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माओवादियों की सामानांतर सरकार भंग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादी नेता प्रचंड ने विद्रोह के दौरान चलाई जा रही समानांतर सरकार को भंग करने की औपचारिक घोषणा कर दी है. माओवादी नेता प्रचंड ने गुरुवार को इसकी घोषणा की. पर्यवेक्षकों का मानना है कि नेपाल में काफ़ी बड़े क्षेत्र में चलाई जा रही इस व्यवस्था को भंग करना शांति प्रक्रिया का एक अहम कदम है. उल्लेखनीय है कि शांति समझौते के तहत माओवादी संसद में शामिल हो चुके हैं और वे जल्दी ही अंतरिम सरकार में शामिल हो जाएँगे. लेकिन प्रचंड ने कहा है कि उनकी पार्टी का लक्ष्य अब भी नेपाल को कम्युनिस्ट देश बनाना है और संसद में आने से या फिर सत्ता में भागीदार बनने से माओवादियों ने ये मक़सद त्याग नहीं दिया है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि माओवादियों की इस घोषणा से बहुत से लोगों ने राहत की साँस ली होगी. हथियार डालना शुरु
एक दशक के संघर्ष के बाद 2006 में माओवादियों और सरकार के बीच शांति समझौता हुआ था जिसमें माओवादियों का हथियार डालना एक प्रमुख शर्त थी. नेपाल में माओवादियों ने संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में बुधवार से हथियार डालने शुरु कर दिया था. पर्यवेक्षकों की इस काम में सेवानिवृत्त गोरखा सिपाही सहायता कर रहे हैं. ये नेपाली सिपाही भारतीय और ब्रितानी सेना में काम कर चुके हैं. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों ने माओवादी विद्रोहियों के हथियारों को जमा करना शुरु कर दिया है. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में अंतरिम संविधान पर सहमति16 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सरकारी नियुक्तियों के विरोध में 'नेपाल बंद'19 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस पूर्व गोरखा सैनिक संभालेंगे ज़िम्मेदारी22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में आज से काम संभालेंगे पर्यवेक्षक08 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस नेपाल में हज़ारों माओवादी बीमार हुए12 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में निरस्त्रीकरण समझौता28 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में ऐतिहासिक शांति समझौता21 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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