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पूर्व गोरखा सैनिक संभालेंगे ज़िम्मेदारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल सरकार ने माओवादियों के साथ चल रही शांति प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए पूर्व गोरखा सैनिकों की नियुक्ति प्रकिया शुरू कर दी है. इसके तहत ऐसे पूर्व सैनिकों को नियुक्त किया जाएगा जो भारतीय और ब्रितानी सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं. ये सैनिक माओवादी विद्रोहियों से जमा कराए गए हथियारों की निगरानी करेंगे. हाल ही में नेपाल की बहुदलीय सरकार के साथ माओवादी विद्रोहियों ने 10 वर्ष से ज़्यादा समय से जारी संघर्ष को ख़त्म करने के लिए निरस्त्रीकरण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत हज़ारों माओवादी विद्रोही और उनके हथियार सात मुख्य कैंपों में रखे गए हैं. इनकी निगरानी के लिए 111 पूर्व गोरखा सैनिकों की नियुक्ति अस्थायी रूप से की जानी है. इसके लिए शुक्रवार को गृह मंत्रालय ने पूर्व गोरखा सैनिकों से आवेदन आमंत्रित किए हैं. इस बाबत गृह मंत्रालय का कहना है कि जब तक संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षक नहीं पहुँच जाते, ये सैनिक ही निगरानी का काम संभालेंगे. उधर, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारयों का कहना है कि हथियारबंद निरीक्षकों के बहुराष्ट्रीय दल को नेपाल पहुँचने में दो महीने तक का समय लग सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'समलैंगिक हो रहे हैं माओवादी'21 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सरकारी नियुक्तियों के विरोध में 'नेपाल बंद'19 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाली शांति प्रक्रिया को भारत का समर्थन17 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में अंतरिम संविधान पर सहमति16 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में हज़ारों माओवादी बीमार हुए12 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस पहली बार नेपाल नरेश ने दिया टैक्स08 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में ऐतिहासिक शांति समझौता21 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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