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नेपाल में ऐतिहासिक शांति समझौता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में क़रीब दस साल से जारी विद्रोही हिंसा को समाप्त करने के इरादे से सरकार और माओवादी विद्रोहियों के बीच एक शांति समझौते पर दस्तख़त किए गए हैं. समझौते पर प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला और विद्रोही माओवादी नेता पुष्प कमल दहाल उर्फ़ प्रचंड ने मंगलवार को राजधानी काठमाँडू में दस्तख़त किए. नेपाल में राजशाही को समाप्त करने की मुख्य माँग के साथ पिछले क़रीब दस साल से जारी विद्रोही हिंसा में हज़ारों लोग मारे गए हैं और इस समझौते से यह हिंसा रुक सकेगी इसलिए इसे बहुत अहम माना जा रहा है. इस समझौते के बाद अब माओवादी विद्रोही अपने हथियार डालकर संक्रमणकालीन सरकार में भी शामिल हो सकेंगे. माओवादियों के हथियारों को संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में रखा जाएगा. पिछले क़रीब दस साल के समय में नेपाल सरकार और माओवादी विद्रोही दोनों पर ही मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे हैं और लड़ाई में 13 हज़ार से भी ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है. ग़ौरतलब है कि अप्रैल 2006 में राजशाही के विरोध और लोकतांत्रिक सरकार की बहाली की माँग के समर्थन में व्यापक प्रदर्शन हुए थे जिनके बाद राजा ज्ञानेंद्र को अपना सीधा शासन समाप्त करके संसद को बहाल करना पड़ा था. उसके साथ ही एक बहुदलीय सरकार का भी गठन किया गया था और सरकार और माओवादी विद्रोहियों के बीच बातचीत का दौर भी शुरू हुआ था. तभी से दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम भी लागू था. लड़ाई का अंत 52 वर्षीय माओवादी नेता प्रचंड ने समझौते पर दस्तख़त करने के बाद कहा, "इसके साथ ही देश में क़रीब एक दशक से जारी गृह युद्ध समाप्त हो जाएगा." सरकार की तरफ़ से प्रमुख वार्ताकार कृष्ण प्रसाद सितौला ने समझौते पर दस्तख़त होने के बाद कहा, "अब लड़ाई का दौर समाप्त हो चुका है."
काफ़ी लंबी और सघन बातचीत के बाद ही यह समझौता संभव हो सका है. सितौला ने कहा कि छह महीने पहले दोनों पक्षों ने जिस संघर्ष विराम की घोषणा की थी अब वह स्थाई बन गया है और अब जो भी पक्ष उसका उल्लंघन करेगा उसे दंड भुगतना पड़ेगा. इस समझौते के बाद माओवादी अब अपने हथियार डालकर संसद और सरकार में भाग लेंगे और अपना गुरिल्ला दर्जा छोड़ देंगे. काठमाँडू में बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेवीलैंड का कहना है कि इस समझौते की कई साल से उम्मीद की जा रही थी. इस समझौते पर दस्तख़त होने के बाद जब इसकी घोषणा की गई तो उत्सव जैसा माहौल बन गया और सभा में अनेक राजनीतिज्ञ, राजनयिक और समाज के प्रबुद्ध लोग मौजूद थे. प्रचंड ने कहा, "इस समझौते पर दस्तख़त के साथ ही देश में 238 साल पुरानी सामंती व्यवस्था का अंत हो गया है. हमारी पार्टी अब एक नए नेपाल के निर्माण की दिशा में पूरी ज़िम्मेदारी और उत्साह के साथ काम करेगी." नेपाली प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला भी इसी तरह से उत्साहित नज़र आए. उन्होंने कहा, "इस समझौते से देश में हिंसा, आतंक और हत्याओं की राजनीति का अंत हो गया है और सहयोग की राजनीति का एक नया दौर शुरू हुआ है." गिरिजा प्रसाद कोईराला ने कहा, "मैं शांतिपूर्ण समाधान खोजने के लिए प्रचंड का भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ. नेपाल ने अब एक नए दौर में प्रवेश किया है और इससे शांति की दिशा में एक नया रास्ता खुला है." 85 वर्षीय कोईराला ने कहा, "अब ज़रूरत इस बात की होगी कि हम सहयोग और समझदारी के साथ आगे बढ़ें ताकि इस समझौते को कामयाब और असरदार साबित किया जा सके." संयुक्त राष्ट्र ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि इसे शांति प्रक्रिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम बताया है. |
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