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कर्नाटक में देसी शराब पर प्रतिबंध लगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कर्नाटक में देसी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि देसी शराब की बिक्री से ग़रीब परिवार के लोगों पर बुरा असर पड़ रहा था. कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री बीएस येदीयूरप्पा ने शुक्रवार को विधानसभा में बजट पेश करते हुए यह घोषणा की. कर्नाटक में देसी शराब 'अरक' के नाम से चर्चित है. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर प्रतिबंध जुलाई 2007 से प्रभावी होगी. अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार से इस क़दम से सरकारी ख़जाने को राजस्व मद में लगभग 42 करोड़ 50 लाख रुपए का नुक़सान होगा. 'बुरा असर' उपमुख्यमंत्री येदीयूरप्पा का कहना था कि राजस्व हानि के बावजूद अरक पर प्रतिबंध लगाना ज़रुरी था क्योंकि परिवारों को इसके सामाजिक प्रभाव से बचाना ज़रूरी है. उन्होंने कहा, "अरक के उपभोग का समाज पर बुरा असर पड़ रहा है. इसे देखते हुए प्रतिबंध लगाया गया है." राज्य में कई महिला संगठन और पिछड़ी जातियों के लोग इस पर प्रतिबंध लगाने की माँग लंबे अरसे से कर रहे थे. उनका कहना था कि सरकारी लाइसेंसप्राप्त दुकानों से बिक रही देसी शराब ने गाँवों में रहने वाले ग़रीब लोगों की ज़िंदगी बर्बाद कर दी है. सस्ती होने के कारण देसी शराब की खपत ज़्यादा हो रही थी. इसकी लत ने कई परिवारों को दीवालिया बना दिया. कई राजनीतिक दलों ने सरकार के इस क़दम का स्वागत किया है. दूसरी ओर देसी शराब बनाने में महारत रखने वाले इदिगा समुदाय ने प्रतिबंध का विरोध करने का फ़ैसला किया है. |
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