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शराब के विज्ञापन से फँसे मोहनलाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केरल में मलयाली फिल्मों के सुपरस्टार मोहनलाल व्हिस्की के विज्ञापनों को लेकर विवादों में आ गए हैं. शराबबंदी की वकालत करने वाले कार्यकर्त्ताओं का कहना है कि शराब का सीधे तौर कर विज्ञापन न करने के क़ानून का उल्लंघन करने के लिए मोहनलाल को माफ़ी मांगनी चाहिए. स्थानीय मलयालम फिल्मों में अपनी भूमिकाओं को लेकर मोहनलाल के चाहने वालों की तादाद काफी है. मोहनलाल की कुछ हिंदी फिल्में भी काम किया है जिनमें रामगोपाल वर्मा की 'कंपनी' प्रमुख है. शिकायतकर्त्ताओं का कहना है कि मोहनलाल का शराब के विज्ञापन में आने से नशाख़ोरी को बढ़ावा मिलेगा. भारत में शराब के विज्ञापन पर पाबंदी है. शराब निर्माताओं ने इस प्रतिबंध से चालाकी से बच निकलने के लिए तरह-तरह के तरीके निकाले हैं. ज़्यादातर शराब निर्माता कंपनियाँ टी-शर्ट, सोडा, ताश और ऐसी ही अन्य चीज़ों के नाम पर शराब का विज्ञापन करती हैं. इस मामले में केरल भर में टीवी विज्ञापनों में और होर्डिंगों पर कई अवार्ड जीत चुके मोहनलाल पूछते नजर आते हैं, “आज शाम क्या कर रहे हैं?” टीवी विज्ञापन में शराब के साथ लोकप्रिय 'बनाना चिप्स' हाथ में लेकर घूमते मोहनलाल रास्ते में जिनसे भी मिलते हैं यही सवाल पूछते नजर आते हैं. इस द्विअर्थी सवाल का निहितार्थ समझा जा सकता है. लेकिन उनके विरोध में तेजी तब आई जब उन्हें बार और होटलों के भीतर 'बनाना चिप्स' और एक नामी व्हिस्की के साथ खाने की मेज पर बैठा दिखाया गया.
कोट्टायम स्थित एक गैर-सरकारी संगठन महात्मा गाँधी नेशनल फाउंडेशन को यह बात इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने मोहनलाल के माता-पिता, पत्नी और बच्चों के नाम एक आपत्तिनामा लिख कर भेज दिया. इसमें लिखा था, “क्या आप नशे में धुत्त मोहनलाल को हर शाम घर में घुस कर मटरगश्ती करते देखना पसंद करेंगे?” फाउंडेशन के चैयरमैन एबी जे जोस का कहना है कि बार में इस तरह का इश्तहार लगाया जाना गैर-क़ानूनी है क्योंकि केरल मद्यनिषेध अधिनियम के अंतर्गत शराब के किसी भी तरह के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन की अनुमति नहीं है. जोस ने कहा, “उन्हें पद्मश्री का सम्मान मिल चुका है. यह एक ऐसा सम्मान है जो भारत के विशिष्ट नागरिकों को ही दिया जाता है. इस तरह की उपाधि धारण करने वालों को दूसरों के लिए अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए.” फाउंडेशन ने मोहनलाल से यह उपाधि लौटाने तक की माँग की है. उल्लेखनीय है कि मलयालम फिल्मों में मोहनलाल के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी ममूटी ने 2004 में राज्य के लोगों में कोक विरोधी भावना को देखते हुए कोका कोला के विज्ञापन के एक प्रस्ताव से हाथ खींच लिया था. | इससे जुड़ी ख़बरें स्कूली बच्चों को अमानवीय सज़ा 07 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस आम लोगों तक 'शाही शराब' | भारत और पड़ोस बच्चों के भोजन में शराब और भाँग27 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस मुंबई में ज़हरीली शराब से 60 मरे29 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस असम में ज़हरीली शराब से 25 की मौत01 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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