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बुधवार, 21 फ़रवरी, 2007 को 11:29 GMT तक के समाचार
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ज़िंदगियाँ नहीं बचीं, लाशें बचा कर रखेंगे

समझौता एक्सप्रेस से निकाली गईं लाशें
समझौता एक्सप्रेस हादसे में मारे गए लोगों की लाशों को कम से कम एक महीने तक सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है ताकि सगे संबंधियों को किसी तरह उनके परिजनों के अवशेष मिल सकें.

हरियाणा स्वास्थ्य सेवाओं के प्रमुख एन के शर्मा बताते हैं कि इसके लिए लाशों का एमबाल्मिंग किया गया है ताकि उन्हें अधिक से अधिक दिनों तक सुरक्षित रखा जा सके.

वो कहते हैं "एमबाल्मिंग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके तहत हम लाशों को विशेष प्रकार के रसायनों मे डाल कर रखते हैं. इससे वे ख़राब नहीं होती हैं. काफी दिनों तक बचती हैं. अगर इसके साथ एयरकंडीशन की व्यवस्था हो तो महीने भर तक लाशों को बचाया जा सकता है."

ज़िदगी तो नहीं रहीं कम से कम लाशें ही परिवारों को मिल सकेंगी. यही कोशिश है डॉक्टरों की.

शर्मा बताते हैं कि अभी भी कई लाशें पहचानी जानी हैं और इसी कारण सभी लाशों को लकड़ी के ताबूतों में रखा गया है ताकि लोग उन्हें आसानी से देख सकें.

बुरी तरह जली लाशों से डीएनए के नमूने लिए गए हैं और इसके लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के साथ संपर्क किया गया है.

जिस किसी व्यक्ति को अपने रिश्तेदारों की पहचान में दिक्कत होगी वे एम्स में जाकर अपना डीएनए नमूना दे सकते हैं ताकि उन्हें अपने परिजनों के अवशेष मिल सकें.

पानीपत का सिविल अस्पताल पिछले तीन दिनों से सोया नहीं है. डॉक्टर, नर्सें और अस्पताल का स्टाफ दिन रात काम कर रहा है.

कोई अफरा तफरी नहीं, कोई भागा दौड़ी नहीं. सभी के चेहरे पर दुख का भाव है लेकिन वे चुपचाप अपना काम किए जा रहे हैं और संबंधियों को दिलासा भी दे रहे हैं.

आने वाले दिनों में ताबूतों को कहीं और रखने की योजना है ताकि देर से आने वाले रिश्तेदारों के लिए पहचान की व्यवस्था और आसान हो पाए.

लेकिन उन लाशों का क्या होगा जिनकी बिल्कुल पहचान नहीं हो सकेगी.

अधिकारी बताते हैं कि वे इंतज़ार करेंगे कुछ दिनों तक और अगर फिर भी कोई दावा नहीं करेगा तो लाशों को स्थानीय मुस्लिम संगठनों के हवाले कर दिया जाएगा ताकि उन्हें दफ़न किया जा सके.

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