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'दोस्ती के सफ़र पर दहशतगर्दों का कहर' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सभी प्रमुख अख़बारों ने समझौता एक्सप्रेस में हुए धमाकों से संबंधित ख़बरों को प्रमुखता दी है और पाकिस्तान के साथ रिश्तों पर इसके संभावति असर के बारे में अपना नज़रिया सामने रखा है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने सुर्ख़ी लगाई है 'अटैक ऑन समझौता'. अख़बार लिखता है कि तीन युद्धों के गवाह बने पानीपत में भारत और पाकिस्तान के परस्पर सहयोग की प्रतीक समझौता एक्सप्रेस आग की लपटों में झुलस गई. इस रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि घटना के पीछे चरमपंथी लश्करे तैबा का हाथ हो सकता है. अख़बार ने पहले पन्ने पर ही पाकिस्तानी शहर फ़ैसलाबाद के राणा शौकत अली के परिवार का ज़िक्र किया है जिनके पाँच बच्चे समझौता एक्सप्रेस में ज़िंदा जल गए. हिन्दुस्तान टाइम्स लिखता है कि पानीपत में शांति की रेलगाड़ी पर हमला हुआ. अख़बार ने अपने संपादकीय में लिखा है कि यह एक चरमपंथी हमला है जिसका मक़सद भारत-पाकिस्तान के बीच जारी शांति वार्ता को पटरी से उतारना है. शांति की प्रतिबद्धता इंडियन एक्सप्रेस ने ग्राफ़ के ज़रिए पूरे घटनाक्रम को समझाने की कोशिश की है. इसका कहना है कि चरमपंथियों ने भारत और पाकिस्तान दोनों को निशाना बनाया है. अख़बार ने इस बात को प्रमुखता दी है कि समझौता एक्सप्रेस में हुए धमाके के बावजूद दोनों देश एक दूसरे पर उंगली उठाने के बजाए अमन की राह पर चलने पर प्रतिबद्ध हैं. एक रिपोर्ट बुरी तरह जले शवों की शिनाख़्त में आ रही दिक्क़तों पर है. अख़बार ने बिना पासपोर्ट के दो लोगों को टिकट देने पर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के बुकिंग क्लर्क को निलंबित करने की रिपोर्ट प्रकाशित की है.
अख़बार ने अपने संपादकीय में लिखा है कि इस मानवीय त्रासदी ने दोनों देशों को एक-दूसरे पर आरोप लगाने की परंपरा को आगे बढ़ाने से रोक दिया. दैनिक हिन्दुस्तान लिखता है कि इस घटना के पीछे जाँच एजेंसियों को जैश-ए-मोहम्मद और लश्करे तैबा का हाथ होने की आशंका है. इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के हवाले से अख़बार का कहना है कि चरमपंथियों ने जानबूझ कर उस गाड़ी को निशाना बनाया जो संवेदनशील है. 'द हिंदू' ने अपने संपादकीय में लिखा है कि पहले भी जब दोनों देशों के बीच आपसी रिश्ते मजबूत बनाने की कोशिशें तेज़ हुई है, तब चरमपंथियों ने इसे बिगाड़ने की कोशिश की है. हालाँकि अख़ाबर ने समझौता एक्सप्रेस में की गई सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया है. राष्ट्रीय सहारा का हेडलाइन है - दोस्ती के सफ़र पर दहशतगर्दों का कहर. तो दूसरी ओर नवभारत टाइम्स ने सुर्ख़ी लगाई है, '..मगर अमन की रेल चलती रहेगी.' दैनिक जागरण ने अपने संपादकीय में लिखा है कि दो देशों के बीच सदभाव और संपर्क की प्रतीक समझौता एक्सप्रेस पर हमला भारत और साथ ही पाकिस्तान को यह संदेश देने वाली एक और जघन्य वारदात है कि मौजूदा तौर-तरीकों से आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाई जा सकती. |
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