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मंगलवार, 20 फ़रवरी, 2007 को 12:38 GMT तक के समाचार
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'शांति प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए'
पाकिस्तानी अख़बार
पाकिस्तानी अख़बारों ने शांति प्रक्रिया को जारी रखने की हिमायत की है
भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती के प्रतीक के रूप में चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में रविवार, 18 फ़रवरी की रात को हुए बम धमाकों ने सबको हिलाकर रख दिया है.

पाकिस्तान के कुछ अख़बारों में भी इस ख़बर को प्रमुखता मिली है और ज़्यादातर अख़बारों ने इस हादसे के बाद भी दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया को जोरी रखने की हिमायत की है.

पाकिस्तान के एक प्रमुख अंग्रेज़ी दैनिक डॉन ने लिखा है - शांति रेल को पटरी से उतारने की ख़ूनी कोशिश.

अख़बार ने भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि समझौता रेलगाड़ी पर हमले से दोनों देशों के बीच शांति वार्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

अख़बार ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के वह बयान भी छापा है जिसमें उन्होंने कहा है कि इस तरह के चरमपंथी हमले से शांति प्रक्रिया को और टिकाऊ बनाने की दोनों देशों की इच्छाशक्ति और मज़बूत होगी. इन धमाकों में हुई मौतों पर दुख व्यक्त करते हुए परवेज़ मुशर्रफ़ ने उम्मीद जताई कि भारत सरकार इस घृणास्पद अपराध के दोषी लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए हर संभव कोशिश करेगी.

रावलपिंडी से प्रकाशित अख़बार जंग ने समझौता एक्सप्रेस में धमाकों की ख़बर छापने के बाद लिखा है, "दोनों देशों के अधिकारियों को यात्रियों के सामान की जाँच-पड़ताल करने में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए और संदिग्ध यात्रियों पर कड़ी नज़र रखनी होगी ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके."

अख़बार आगे लिखता है, "हम दोहराते हुए कहते हैं कि दोनों देशों के बीच चल रही शांति प्रक्रिया में इस तरह की दुखद घटनाओं से बाधा नहीं खड़ी होनी चाहिए. और यह तभी संभव है जब दोनों देश एक दूसरे पर लगाने वाले निरर्थक आरोप-प्रत्यारोप के सिलसिले से बचें."

इस्लामाबाद से प्रकाशित नवा-ए-वक़्त अख़बार ने भारत के रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव का यह बयान छापा है कि समझौता एक्सप्रेस पर यह हमला भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता में बाधा पहुँचाना है.

अख़बार ने आगे लिखा है, "लालू प्रसाद यादव को अपने देश में ही इस तरह के तत्वों की पहचान करने की कोशिश करनी चाहिए जो शांति प्रक्रिया के विरोधी हैं और सरकार ने उन्हें आज़ाद क्यों छोड़ रखा है... भारतीय नेताओं को अपनी हठधर्मिता छोड़कर देश में स्थिति ठीक करने पर ध्यान देना चाहिए."

अख़बार ने ऐसी किसी भी चरमपंथी हमलों की निंदा की है जिसमें बेक़सूर लोग मारे जाते हैं.

इस्लामाबाद से ही प्रकाशित एक अन्य अख़बार ख़बरें ने लिखा है कि यह कोई दुर्घटना से हुआ धमाका नहीं था. यह एक सुनियोजित और आतंकवादी कार्रवाई है.

अख़बार ने सवाल उठाया है, "सूचना के आधार पर पता चलता है कि ट्रेन में से विस्फोटकों से भरे दो बैग बरामद हुए. सवाल ये उठता है कि जब समझौता एक्सप्रेस दिल्ली से रवाना हुई थी तो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की नज़र से वे कैसे बच गए. इन धमाकों की ज़िम्मेदारी भारत सरकार पर पहुँचती है."

ख़बरें अख़बार ने कहा है कि भारत सरकार को इस घटना की मिली-जुली जाँच के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों को भी आमंत्रित करना चाहिए, नहीं तो दोनों देशों के बीच जारी शांति वार्ता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है जो व्यापक शांति और दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए अच्छा नहीं होगा.

घटनास्थल की तस्वीरें
दिल्ली-अटारी समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट.
परिजनपरिजनों का दर्द...
दिल्ली में अपने परिजनों को खोज रहे हैं लोग
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