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शिनाख़्त के लिए पाक से लोग पहुँचे

पाकिस्तान से आए लोग
पाकिस्तान से अपने रिश्तेदारों की तलाश में लोग आए हैं
समझौता एक्सप्रेस में मारे गए अपने रिश्तेदारों की शिनाख़्त के लिए पाकिस्तान से नौ लोग पानीपत पहुँच गए हैं.

नौ रिश्तेदारों का पहला जत्था बुधवार सुबह पहुँचा और इन लोगों ने लाशों को पहचानने की हरसंभव कोशिश की. कुछ लाशें पहचानी गईं, कई की पहचान बाकी है.

उल्लेखनीय है कि अभी तक केवल 18 मृतकों की शिनाख़्त हो पाई है. दिल्ली से अटारी जा रही समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोट में 68 लोगों की मौत हो गई थी.

पाकिस्तान से आए मोहम्मद अख्तर अली कहते हैं,'' पता नहीं चल रहा है कि कौन सी लाश किसकी है. इतनी जली हुई लाशें हैं कि क्या कहा जाए. जिसने भी ये किया है ग़लत किया है.''

हालांकि अख्तर को अपने रिश्तेदार के बचने की उम्मीद है. वो कहते हैं,'' हमें तो देर रात पता चला है कि शायद हमारा रिश्तेदार दिल्ली से चला नहीं है. हम दुआ करते हैं कि वो बच गए हों.''

लेकिन ऐसी खुशकिस्मती सभी की नहीं है. हैदराबाद से आए ज़ाहिद हुसैन कहते हैं कि उन्होंने अपने चार रिश्तेदारों को पहचान लिया है.

भरी हुई आंखों से वो कहते हैं,'' मेरे भाई भाभी और उनके दो बच्चे मारे गए. सभी की पहचान हुई है. क्या बताएं. लाशें इतनी बुरी तरह जली हैं कि अंतिम बार देख भी नहीं सके उनके चेहरे. कहां ले जाएं ये लाशें. यहीं दफन करेंगे. पाकिस्तान नहीं ले जा सकते.''

शिनाख्त की पीड़ा

उधर इस दल के साथ आए एक और व्यक्ति शहज़ाद चुप हैं. वो मीडिया से बात नहीं करना चाहते हैं. वो कहते हैं कि उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए.

 मेरे भाई भाभी और उनके दो बच्चे मारे गए. सभी की पहचान हुई है. क्या बताएं. लाशें इतनी बुरी तरह जली हैं कि अंतिम बार देख भी नहीं सके उनके चेहरे. कहां ले जाएं ये लाशें. यहीं दफन करेंगे. पाकिस्तान नहीं ले जा सकते
ज़ाहिद हुसैन

बार बार पूछने पर बस इतना कहते हैं कि अभी लाश मिली नहीं है और वो अब दिल्ली जाएंगे. उन्हें उम्मीद है कि शायद उनका रिश्तेदार घायलों में निकल आए.

शहजाद कहते हैं,'' घायलों में नहीं हुआ तो फिर डीएनए टेस्ट का इंतज़ार करुंगा. तभी कुछ पता लग सकेगा.''

पाकिस्तान से आए दल के साथ भी वही पहचान की समस्याएँ हैं. जली हुई लाशों के पास से मिली चीज़ों के आधार पर शिनाख्त हो रही है.

मोहसिन भी पानीपत पहुँचा है, उसे अपने अब्बा की तलाश है. जैसे ही कैमरे उस पर केंद्रित होते हैं. उसकी आंखों से आँसू टपकने लगते हैं. वो बात नहीं करना चाहता.

उसकी आँखों में पिता का चेहरा भी अंतिम बार नहीं देख पाने का दुख छलक उठता है.

कुरान की आयतें पढ़ता मोहसिन चुप हो जाता है और फिर कहता है हमें जाने दीजिए.

पाकिस्तानी दल के आने के बाद स्थानीय पुलिस का रवैया थोड़ा बदला हुआ है. अब वो मीडिया से आग्रह कर रहे हैं कि पाकिस्तानी दल को परेशान न किया जाए.

लाशें पहचानी जाएंगी......कागज़ी कार्रवाई होगी, शायद दिल्ली भी जाना पड़े. और रिश्तेदार आने वाले हैं.

बार बार वही लाशें दिखाई जाएंगी और लोगों को न केवल अपने रिश्तेदारों के मरने का बल्कि उनकी लाशों को पहचानने की दर्द भरी कार्रवाई से भी गुज़रना पड़ेगा.

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