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'शुरू में समझ नहीं आया कि हुआ क्या' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रात में जब सभी यात्री सो रहे थे और समझौता एक्सप्रेस अपनी सामान्य गति से आगे बढ़ रही थी कि तभी एक औरत ने देखा कि ट्रेन में आग लगी हुई है. सहारनपुर की रहने वाली ज़ुबैदा नाम की इस महिला ने बताया कि आधी रात को ट्रेन में सवार लोग शोर मचाने लगे कि ट्रेन में आग लग गई है. ज़ुबैदा ने समाचार एजेंसियों को बताया," शुरू में तो मैं और कुछ अन्य यात्री समझ ही नहीं पाए कि आख़िर हुआ क्या है." पाकिस्तान में क़राची जा रही ज़ुबैदा ट्रेन में हुए धमाकों के बाद एक विशेष शिविर में रुकी हुईं हैं. (हताहतों से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए रेलवे प्रशासन ने कुछ हेल्प लाइन नंबर उपलब्ध कराए हैं - ज़ुबैदा ट्रेन की जिस बोगी में यात्रा कर रही थीं उसके ठीक बगल वाली बोगी में आग लगी थी. उन्होंने कहा,"मैंने बाहर देखा कि हमारी बोगी के पीछे वाली बोगी में आग लग गई है. आग की वज़ह से पूरी ट्रेन में अफ़रा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित जगहों की तरफ भागने लगे." चोट ट्रेन में मची भगदड़ से ज़ुबैदा के पैर में चोट लग गई. समझौता एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे दिल्ली के अज़ीज़ अहमद धमाकों के बाद मची भागमभाग में अपने हाथ में चोट खा बैठे. अज़ीज़ अहमद ट्रेन से रावलपिंडी जा रहे थे. अनारक्षित बोगी में यात्रा कर रहे अज़ीज़ ने बताया,"रात में क़रीब पौने बारह और 12 बजे के बीच ट्रेन में आग लगी." उन्होंने बताया कि ट्रेन में आग लगी देखकर उनके साथ के दो यात्री तो चलती ट्रेन से ही कूद गए और किसी ने आपात् कालीन चेन खींच दी जिससे ट्रेन रुक गई. समझौता एक्सप्रेस की पाँच बोगियों को दिवाना नाम की जगह पर रखा गया है जिसमें बुरी तरह से जल चुकी दो बोगियाँ भी शामिल हैं. रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि धमाकों में घायल कुछ लोगों को रेलवे के डॉक्टरों ने प्राथमिक चिकित्सा दे दी है और चिकित्सा सुविधाओं से लैस एक ट्रेन घटना स्थल पर भेज दी गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें समझौता एक्सप्रेस में आग18 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस ' दो देशों की दोस्ती तोड़ने का प्रयास'19 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस धमाकों के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी 19 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट, 66 लोगों की मौत19 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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