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बुझी नहीं है उम्मीद की किरण.... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
समझौता एक्सप्रेस में जल चुके लोगों की लाशों की पहचान और उन्हें ले जाने का काम काफ़ी कठिन साबित हो रहा है. ज़ाहिर है कि लाशें बुरी तरह जली हैं लेकिन कुछ और दिक्कतें भी हैं. जहाँ एक ही परिवार के कई रिश्तेदार आ जुटे हैं वहीं कई परिवार ऐसे भी हैं जो यह मानने को तैयार नहीं कि उनके परिजन मारे गए हैं. वो उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद उनका रिश्तेदार बच गया हो. फ़र्रुखाबाद से आए एक परिवार पर मेरी नज़र लगातार थी. इस परिवार के छह लोग एक साथ मारे गए हैं. सोमवार की देर रात परिवार के कुछ लोग आए और भोर के समय सभी लाशों की पहचान की जा सकी. अब दिक्कत ये है कि लाशें कैसे ले जाएँ. पाकिस्तान ले जाएँ या भारत में रखें. वकार के पिता अफ़ाक हुसैन बताते हैं," मैं देर रात पहुँचा हूँ और लाशें पहचानी हैं. अब देखिए कब तक उन्हें लेकर जा पाता हूँ. मेरा तो सबकुछ लुट गया है. मेरी दो बहनें और बहनोई सब चले गए." इस परिवार के लोग फ़रुखाबाद और दिल्ली से पहुंचे हुए थे. वहीं सीलमपुर से आई कुरैशिया बेगम कहती हैं कि लाशें कैसे पहचानी गई ये वो नहीं जानती हैं. 'हम दुआ करते हैं कि वो बच गए हों'
उधर राजबीर सिंह अपने मौसा स्वर्ण सिंह को खोजने अमृतसर से आए हैं. वो कहते हैं," एक शव पर हमें शक है. हमने ऊंगलियां देखी हैं पहचानने की कोशिश कर रहे हैं. हम दुआ करते हैं कि वो बच गए हों. " लेकिन राजबीर के एक संबंधी बलविंदर सिंह साफ़ कहते हैं कि लाश पहचान ली गई है लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं. सब अंतिम उम्मीद लगाए हैं. बलविंदर कहते हैं कि लाशें देखने औरतें भी आई हैं तो उन्हें नियंत्रण में करना मुश्किल होगा. दिक्कत यहीं ख़त्म नहीं होती. रात में पहचानी जा चुकीं चार लाशें एंबुलेंसों में बड़ी मुश्किल से लादी गईं. एंबुलेंस छोटे थे. ताबूत बड़े. देरी हो रही है वो अलग. कागज़ी कार्रवाई, गाड़ी की व्यवस्था... सबकुछ में समय तो लगता ही है. कई लाशें वाकई पहचानने लायक हालत में नहीं हैं और डॉक्टर इसके लिए विशेष व्यवस्था कर रहे हैं. पानीपत अस्पताल के तेजिंदर खरबंदा बताते हैं कि डीएनए टेस्ट के लिए नमूने लिए गए हैं और वो हैदराबाद भेजे जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि लाशों को विशेष पैकेट में रखा गया है ताकि वो कम से कम तीन चार दिन और ख़राब न हों. वो कहते हैं," लाशें पूरी तरह जली हुई हैं तो ज़्यादा दिन तक रहेंगी. आधी जली लाशें जल्दी ख़राब हो जाती हैं. " डीएनए टेस्ट, रक्त का परीक्षण, शिनाख्त, पुलिस की कार्रवाई, अस्पताल की कार्रवाई, फिर कागज़ी कार्रवाई.....अपने रिश्तेदार खोने वालों की राह पानीपत के अस्पताल में ख़त्म होती नहीं दिखती. वो शायद पाकिस्तान से भी दूर तक जाती है. |
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