BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 20 फ़रवरी, 2007 को 10:50 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
सपना देखने वाले तो हाशिए पर चले गए

उत्तराखंड राज्य
पृथक राज्य के लिए उत्तराखंड ने लंबी लड़ाई लड़ी थी
उत्तराखंड की लड़ाई लड़ने वाले बुद्धिजीवियों, लेखकों और मीडियाकर्मियों ने राज्य के लिए एक सपना देखा था. लेकिन वह कारगर नहीं हुआ.

इसका कारण यह है कि जो सपने देखने वाले लोग थे वे राज्यसत्ता के ढाँचे में खप नहीं सकते थे.

जिस तरह सारे देश की स्थिति है, उसी तरह से उत्तराखंड की सत्ता पर भी पेशेवर राजनीतिक लोग आ गए और सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया. और अब उत्तराखंड भी देश के दूसरे राज्यों की तरह चल रहा है.

तो जो लोग सपने देखने वाले थे वो अलग-थलग पड़ गए.

इतना भर है कि राज्य हमारा बन गया और आशावान भर रह सकते हैं कि कभी न कभी कुछ लोग ऐसे ज़रुर आएँगे जो इस सपने को पूरा करेंगे.

लेकिन यह आशा सबके भीतर नहीं है कुछ लोगों के भीतर निराशा भी पनपने लगी है.

वो देख रहे हैं कि इस राज्य में भी वही सब हो रहा है जो बाक़ी जगह हो रहा है. वही अवसरवाद, वही भाई भतीजावाद, वही लूट खसोट. तो अपना सपना अपनी आँखों के सामने टूटता हुआ देखना कष्टदायक ही होता है.

उम्मीद

फिर भी कुछ लोग ऐसे हैं जो हार मानने के लिए तैयार नहीं हैं और लगे हुए हैं कि किसी न किसी तरह से इस राज्य को पटरी पर ले आएँ. उन्होंने कोशिश नहीं छोड़ी है.

 जब मतदाता मत डालता है उससे पहले कई चीज़ें आ जाती हैं. जातिवाद, क्षेत्रवाद और सांप्रदायिकता कुछ ऐसी चीज़ें है जो अक्सर लोक कल्याणकारी योजनाओं के ऊपर हावी हो जाती हैं

वो लोग सत्ता की दौड़ में नहीं है.

वैसे कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सोच रहे हैं कि सत्ता में भागीदारी के बिना कुछ नहीं हो सकेगा. वे अपनी-अपनी तरह से प्रयास कर रहे हैं कि वे सत्ता में भागीदारी करें.

वैसे लगता नहीं कि सत्ता में भागीदारी का उनका सपना आसानी से पूरा हो सकता है क्योंकि मतदाता अपनी तरह से सोचता है.

जब मतदाता मत डालता है उससे पहले कई चीज़ें आ जाती हैं. जातिवाद, क्षेत्रवाद और सांप्रदायिकता कुछ ऐसी चीज़ें है जो अक्सर लोक कल्याणकारी योजनाओं के ऊपर हावी हो जाती हैं.

कुछ लोग प्रयास भी कर रहे हैं. जब उत्तराखंड क्रांतिदल की स्थापना हूई तो उसके संस्थापकों में प्रोफ़ेसर डीडी पंत थे. वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक थे और वे चाहते थे लोगों को अच्छा राज्य बनाने के लिए दिशा दी जाए.

जैसा मैंने कहा कि जब चुनाव हुआ करते हैं तो मुद्दे बदल जाया करते हैं और असली बात छिप जाती है. इसलिए डॉ डीडी पंत चुनाव हार गए. जो लोग राज्य के आंदोलन में उनकी बातों से सहमत थे लेकिन चुनाव में वे लोगों को सहमत नहीं कर सके.

आम आदमी

यह तो रही उनकी बात जो आंदोलन कर रहे थे. लेकिन आम आदमी की भी बड़ी अपेक्षाएँ थीं राज्य को लेकर.

उत्तराखंड
आम लोगों की अपेक्षाएँ बहुत बढ़ गई हैं

जितनी संभव नहीं है शायद उससे कहीं अधिक.

हर आदमी चाहता है कि उसे नौकरी मिल जाए और हर गाँव वाला चाहता है कि उसके घर तक सड़क पहुँच जाए.

हरेक वो सब सुविधाएँ लेना चाहता है जो देहरादून में उपलब्ध हैं. तो ऐसा तो संभव नहीं हो सकता.

जब लोगों को अपेक्षा के अनुरुप चीज़ें नहीं मिलती हैं तो वह निराश हो जाता है. लेकिन मुझे लगता है कि बहुत निराश होने की ज़रुरत नहीं है.

अभी राज्य जिस गति से आगे बढ़ रहा है उससे बहुत अधिक निराश होने जैसी स्थिति भी नहीं है.

सुविधाएँ और योजनाएँ लोगों तक पहुँच रही हैं.

राजनीतिक जैसी है वैसी है और राजनीतिक दलों के दुर्गुण भी वैसे ही हैं लेकिन फिर भी राज्य आगे बढ़ ही रहा है. भ्रष्टाचार भी है. लेकिन इन सबसे लड़ना पड़ेगा.

प्रदेश के बुद्धिजीवी लोगों को बार-बार चेता रहे हैं कि यह लड़ाई चलती रहनी चाहिए. सत्ता की राजनीति जो कर रही है उसके ख़िलाफ़ जो लड़ाई है वो जारी रहना चाहिए.

देखना यह है कि कब लोग व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राज्य के हितों के बारे में सोचेगा.

(विनोद वर्मा से हूई बातचीत के आधार पर)

इससे जुड़ी ख़बरें
बेरोज़गारी और विकास है मुद्दा
19 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस
फिर एक बार हाशिए पर महिलाएँ
19 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस
सशंकित हैं उधमसिंह नगर के सिख
18 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस
उत्तराखंड चुनाव पर मौसम की मार
15 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस
चुनाव प्रचार भी बारात की तरह
10 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस
उत्तराखंड चुनाव पर 'निर्दलीय हमला'
08 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस
उत्तरांचल नहीं, अब उत्तराखंड
29 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>