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शुक्रवार, 09 फ़रवरी, 2007 को 19:17 GMT तक के समाचार
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सिख मुद्दों पर हावी हैं बेरोज़गारी और महंगाई

पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन कंवलजीत सिंह
अकाली दल-भाजपा गठबंधन ने महँगाई, बेरोज़गारी और कृषि के मुद्दे ज़ोरशोर से उठाए हैं
भारत के पंजाब राज्य में 13 फ़रवरी को हो रहे विधानसभा चुनावों के दौरान विकास, बेरोज़गारी और महंगाई जैसे मुद्दे छाए रहे हैं. दो दशक से लगातार उठते रहे सिख मुद्दों पर इस बार राजनीतिक दलों ने कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया है.

राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी का मुकाबला शिरोमणि अकाली दल- भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन से है.

अकाली दल- भाजपा गठबंधन का नेतृत्व कर रहे प्रकाश सिंह बादल समेत अनेक नेताओं ने अपने चुनाव प्रचार में विकास, रोज़गार के अवसर, महंगाई, ग़रीब वर्ग, कृषि और उद्योग जगत के लिए अधिक सुविधाओं की बात की है.

उधर कांग्रेस पार्टी जहाँ राज्य में विकास का दावा कर रही है और अपनी उपलब्धियाँ गिना रही है, वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पंजाब में सुरक्षा की बात उठाई है और डेढ़ दशक पहले राज्य में चली चरमपंथी लहर और उस दौरान रहे माहौल की याद दिलाई है.

किसानों के लिए मुफ़्त बिजली और नहर का पानी देने की नीति और व्यापारी वर्ग के लिए चुँगी माफ़ रखने की बात दोनो ही पक्ष कर रहे हैं.

दूसरी ओर सिखों को भावनात्मक स्तर पर छूने वाले मुद्दे जैसे - सिखों की पहचान, राजधानी चंडीगढ़ पर दावा, पंजाबी बोलने वाले इलाक़ों का पंजाब में विलय इत्यादि इस बार चुनाव प्रचार से लगभग गायब थे.

 हाल के वर्षों में जब-जब किसी एक वर्ग विशेष से संबंधित मुद्दे उठाए गए हैं तो नतीजा ये हुआ है कि पंजाब की जनता ने इसे नापसंद किया है. सिख धार्मिक मामलों पर अकाली दल के भीतर बादल-तोहड़ा विवाद के बाद जब बादल ने सिख पहचान और धर्म संबंधित मुद्दों को बढ़ावा दिया तो 2002 में उन्हें हार का मुँह देखना पडा. किसानों और सिख धर्म संबंधित विषयों को प्रमुखता देने पर यही हाल 2004 के संसदीय चुनावों में कांग्रेस का हुआ
विश्लेषक प्रमोद कुमार

जब अकाली दल अध्यक्ष प्रकाश सिंह बादल से इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, "ये मुद्दे ख़त्म नहीं हुए हैं. केंद्र में जब-जब कांग्रेस सरकार आई है उसने पंजाब के साथ अन्याय किया है. ये ज़रूरी नहीं है कि हर मुद्दे पर जन-संघर्ष हो. केंद्र सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए."

विश्लेषक डॉक्टर प्रमोद कुमार कहते हैं, "हाल के वर्षों में जब-जब किसी एक वर्ग विशेष से संबंधित मुद्दे उठाए गए हैं तो नतीजा ये हुआ है कि पंजाब की जनता ने इसे नापसंद किया है. सिख धार्मिक मामलों पर अकाली दल के भीतर बादल-तोहड़ा विवाद के बाद जब बादल ने सिख पहचान और धर्म संबंधित मुद्दों को बढ़ावा दिया तो 2002 में उन्हें हार का मुँह देखना पडा."

उनका आकलन है, "सिख धर्म और किसानों से संबंधित एजेंडे को प्रमुखता देने के बाद 2004 के संसदीय चुनावों में यही हाल कांग्रेस का हुआ. यही कारण है कि पार्टियाँ सबको साथ लेकर चलने और विकास से संबंधित एजेंडा को प्राथमिकता दे रही हैं."

बेरोज़गारी, महंगाई और आटा-दाल

पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल अध्यक्ष प्रकाश सिंह बादल का कहना है, "रोज़गार प्रदान करने के संबंध में कोई क़दम नहीं उठाए गए हैं. शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में तो पूरी तरह से व्यवस्था ही गड़बड़ा गई है."

अकाली दल अपने चुनाव घोषणा पत्र में किसानों के लिए एक बार कर्ज़ माफ़ी और आसान किस्तों में ऋण चुकाने की बात कर रहा है.

दलितों के लिए अकाली दल बंद की गई शगुन स्कीम फिर लागू करने, यानि दलित लड़कियों की शादी पर शगुन देने की नीति के पक्ष में सामने आया है.

 महंगाई ने तो आम आदमी की कमर ही तोड़ दी है. अकाली दल और भाजपा गठबंधन ने फ़ैसला किया है कि यदि सत्ता में आए तो ग़रीब वर्ग के लिए आटा चार रुपए प्रति किलो और दाल बीस रुपए प्रति किलो उपलब्ध कराया जाएगा
बादल

प्रकाश सिंह बादल अपनी जनसभाओं में कहते हैं, "महंगाई ने तो आम आदमी की कमर ही तोड़ दी है. अकाली दल और भाजपा गठबंधन ने फ़ैसला किया है कि यदि सत्ता में आए तो ग़रीब वर्ग के लिए आटा चार रुपए प्रति किलो और दाल बीस रुपए प्रति किलो उपलब्ध कराया जाएगा."

अकाली दल ने ये वादा किया है कि रोज़गार के लिए अलग विभाग स्थापित किया जाएगा ताकि रोज़ग़ार पाने के काबिल युवक-युवतियों के बारे में पूरी सामग्री एक जगह पर उपलब्ध हो. विशेष कदम उठाए जाएँगे जैसे कि विशेष प्रशिक्षण प्रदान करना और उन्हें सलाह देना.

राज्य में अनेक जगहों पर आम जनता महंगाई और बेरोज़गारी के मुद्दों को अहमियत दे रही है. पटियाला से लेकर अमृतसर और रोपड़ से लेकर बठिंडा तक ये मुद्दे कई लोगों की ज़ुबान पर हैं.

अकाली दल- भाजपा गठबंधन का ये भी वादा है कि ग़रीब लोगों के इलाज के लिए एक बड़ा फंड यानि कोष बनाया जाए ताकि ख़ास तौर पर गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए उनकी मदद की जा सके.

दलितों, किसानों को सुविधाएँ, पारदर्शी प्रशासन

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
कांग्रेस ने दलितों और किसानों को सुविधाएँ देने के साथ पारदर्शी प्रशासन देने का वादा किया है

कांग्रेस के नेता पार्टी के कार्यकाल के दौरान हुए विकास कार्यों के दावे करने के साथ-साथ ग़रीब वर्ग और कृषि क्षेत्र के लिए विशेष सुविधाएँ देने की बात कर रहे हैं.

कांग्रेस पार्टी की सांसद प्रणीत कौर ने बीबीसी को बताया कि गेहूँ और धान की पिछली पाँच साल की फ़सल सरकारी एजेंसियों ने खरीदने में कोई कमी नहीं रखी जिससे किसान को फ़ायदा हुआ है.

कांग्रेस ने आर्थिक मुद्दों को अहमियत देते हुए अत्यंत ग़रीब वर्ग के हर परिवार को एक नौकरी, विशेष स्वास्थ्य सुविधाएँ और दलित वर्ग को मुफ़्त बिजली देने का आश्वासन दिया है.

कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में वादा किया है कि मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्री अपनी संपत्ति का ब्योरा देंगे और पूरे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता कायम की जाएगी. इसी के साथ कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की संपत्ति की जाँच उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश से कराने की बात भी अपने घोषणा पत्र में कही है.

कांग्रेस के नेता ग्रामीण विकास, नई सड़कें बनाने का श्रेय तो लेते ही हैं, साथ ही आश्वासन देते हैं कि अगले पाँच साल में बिजली की आपूर्ति के लिए कदम उठाए जाएँगे ताकि ऊर्जा की माँग पूरी की जा सके.

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