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सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्व क्रिकेटर और भाजपा नेता नवजोत सिंह सिद्धू को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ग़ैर इरादतन हत्या के मामले में राहत देते हुए ज़मानत दे दी है. सिद्धू को चंडीगढ़ की एक निचली अदालत ने गुरुवार को पटियाला जेल भेजने का निर्देश दिया था जिसके बाद वो जेल चले गए थे. नवजोत सिंह सिद्धू ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक अपील दायर की थी जिस पर विचार करते हुए दो जजों वाली पीठ ने ज़मानत के निर्देश जारी किए. नवजोत सिंह सिद्धू चंडीगढ़ की इस अदालत में गुरुवार को आत्मसमर्पण करने पहुँचे थे. उन पर 18 साल पहले एक व्यक्ति की ग़ैर इरादतन हत्या का आरोप था और इसके लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें तीन साल की सज़ा सुनाई थी. इसके अलावा उन्होंने एक और याचिका दायर करके सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि अमृतसर से दोबारा चुनाव लड़ने तक उनकी सज़ा को स्थगित रखा जाए. उल्लेखनीय है कि नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद थे और हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था. मामला ग़ैरइरादतन हत्या का ये मामला 1988 का है. सिद्धू पर आरोप था कि उन्होंने गुरनाम सिंह नाम के एक व्यक्ति की पिटाई की जिसके बाद उसकी मौत हो गई. निचली अदालत ने सिद्धू को इस मामले में पहले बरी कर दिया था लेकिन 1999 में हाईकोर्ट में इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की गई. इसके बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सिद्धू को इस मामले में दोषी ठहराया था. | इससे जुड़ी ख़बरें सिद्धू का आत्मसमर्पण, जेल भेजे गए11 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस तीन साल की क़ैद, गिरफ़्तारी अभी नहीं06 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सिद्धू को तीन साल की क़ैद, गिरफ़्तारी अभी नहीं06 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'मेरी तुलना सोरेन के मामले से न करें'01 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस त्वाडा प्यारा सिद्धू बोल रहा हैगा जी...21 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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