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बेहाल मछुआरे गुर्दा बेचने पर मजबूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिलनाडु सरकार ने इस मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं कि क्या राज्य के मछुआरे अपना गुर्दा बेचने को मजबूर हैं. स्थानीय अख़बारों में इस तरह की ख़बरें छपी हैं कि दो साल पहले आए सुनामी के बाद मछुआरों की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब है जिसके कारण वो अपना गुर्दा यानी किडनी तक बेच रहे हैं. भारत में मानव अंगों के कारोबार पर पाबंदी है. वर्ष 2004 में सुनामी के बाद तमिलनाडु में हज़ारों परिवार बेघर हो गए थे. अकेले नागपट्टनम में ही कम से कम 6,500 लोगों की मौत हो गई थी. सुनामी के बाद तमिलनाडु में पुनर्वास का काम आम तौर पर संतोषजनक है लेकिन राजधानी चेन्नई में काम की गति ज़रा धीमी है. सुनामी के बाद अपने घर बार खो बैठे मछुआरों को समुद्र से कुछ दूरी पर अस्थाई आवासों में ठहराया गया है. समुद्र के पास स्थाई घर बनाने का काम सरकार कर तो रही है लेकिन ये काम भी बहुत धीरे हो रहा है. कुछ परिवारों में पुरुष विकलांग हो गए हैं और कमाने का पूरा बोझ महिलाओं पर आ गया है. इस तरह के परिवारों में देखा गया है कि कुछ लोग अपना गुर्दा बेचकर गुज़ारा करने की कोशिश कर रहे हैं. बीबीसी संवाददाता टीएन गोपालन ने ऐसे लोगों से मुलाक़ात की है जिनका कहना है कि दो जून की रोटी के लिए या तो वो अपना गुर्दा बेच चुके हैं या फिर आने वाले दिनों में बेचने पर विचार कर रहे हैं. ग़ैर सरकारी संस्थाओं का कहना है कि कम से कम 50 लोग ऐसे हैं जो अपनी किडनी बेच चुके हैं. चेन्नई की ज़िला मजिस्ट्रेट आर जया ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि मानव अंग बेचना ग़ैरक़ानूनी है और सरकार इन लोगों के कल्याण के लिए नई योजनाओं पर विचार कर रही है. एक किडनी यानी गुर्दा आम तौर पर एक लाख रुपए के आसपास बिकता है लेकिन अक्सर इसका कम से कम आधा पैसा बिचौलिए ले जाते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि एक किडनी यानी एक गुर्दे से भी आदमी जी सकता है लेकिन कभी-कभी एक किडनी निकाल लेने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भी पैदा हो सकती हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें राहत कार्यों की सराहना की डब्यूएचओ ने13 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस सूनामी पीड़ित राज्यों के लिए 2731 करोड़19 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस निकोबार द्वीप से हज़ारों का पलायन20 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस विश्व रिकार्ड ने बचाई हज़ारों की जान16 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस सूनामी लहरों ने किया उद्धार 16 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस सूनामी चेतावनी केंद्र हैदराबाद में25 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस नागपट्टिनम में समस्याएँ अब भी हैं09 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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