| सूनामी पीड़ित राज्यों के लिए 2731 करोड़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने सूनामी से पीड़ित चार दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए पहले चरण में 2731.04 करोड़ रुपए राहत की घोषणा की है. यह राहत पैकेज तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और पाँडिचेरी के लिए दिया गया है. इसमें अंडमान निकोबार द्वीप समूह शामिल नहीं है और उसकी घोषणा सरकार अलग से करेगी. मंत्रिमंडल की मंज़ूरी के बाद इस राहत की घोषणा करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि पहले चरण में मूल रुप से मछुआरों के लिए और मकानों के लिए सहायता राशि दी जा रही है. उन्होंने कहा कि ढाँचागत सुविधाओं के पुनर्निर्माण और कृषि भूमि में सुधार कार्यो के लिए राहत दूसरे चरण में जल्दी ही दी जाएगी. राहत वित्तमंत्री पी चिंदबरम और कृषिमंत्री शरद पवार ने पत्रकारों को बताया कि सरकार ने राहत राशि अलग-अलग मदों में देने का फ़ैसला किया है.
पी चिंदबरम ने बताया कि इसमें से 861.82 करोड़ रुपए की राशि तात्कालिक राहत कार्यों के लिए है. इस राशि में वो 450 करोड़ शामिल है जिसकी घोषणा पहले ही की जा चुकी है. मछुआरों को अपनी नावें सुधरवाने, मछली पकड़ने का जाल ख़रीदने और अन्य कार्यों के लिए 1093 करोड़ रुपए देने की घोषणा की गई है. इसमें कुछ राशि तो अनुदान के रुप में दी जाएगी और कुछ ऋण के रुप में. ऋण देने में भी मछुआरों को कई तरह की राहत देने की घोषणा की गई है.
दोनों मंत्रियों ने बताया कि दक्षिण भारतीय राज्यों में अनुमान लगाया गया है कि एक लाख 75 हज़ार मकान सूनामी में नष्ट हुए हैं. सरकार ने हर मकान की अनुमानित कीमत 40 हज़ार लगाई है. सरकार ने इस आधार पर 752.30 करोड़ रुपए की राशि राज्य सरकारों को देने की घोषणा की है. यह पूरी राशि राज्य सरकारों को केंद्र की ओर से अनुदान के रुप में दी जा रही है. जैसा कि शरद पवार ने बताया राज्य सरकारों को सिर्फ़ ज़मीन अधिग्रहण का इंतज़ाम करना होगा. अंडमान निकोबार इस राहत पैकेज में अंडमान निकोबार को शामिल नहीं किया गया है.
शरद पवार का कहना था कि अंडमान से नुक़सान का आंकड़ा मिल जाने के बाद वहाँ के लिए राहत की घोषणा अलग से की जाएगी. उन्होंने बताया कि वे अंडमान जा रहे हैं और अगले तीन दिन वहीँ रहकर बैठके करेंगे और इसके बाद वहाँ के लिए राहत के बारे में घोषणा की जाएगी. उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के बाद सबसे ज़्यादा नुक़सान अंडमान निकोबार द्वीप समूहों को ही हुआ है. विदेशी सहायता इस सवाल पर कि सूनामी पीड़ितों को सहायता देने के लिए क्या भारत विदेशी सहायता लेने पर विचार कर रहा है, वित्तमंत्री चिदंबरम ने कहा कि वे पहले ही कह चुके हैं कि भारत आर्थिक रुप से सक्षम है. लेकिन उन्होंने कहा कि भारत बहुपक्षीय सहायता लेने से इंकार नहीं कर रहा है. उन्होंने बताया कि भारत विश्वबैंक, एशियन डवलपमेंट बैंक, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय समुदाय से बात कर रहा है. उल्लेखनीय है कि भारत ने सूनामी के बाद राहत कार्यों के लिए सीधी विदेशी सहायता लेने से इंकार कर दिया था. |
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