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राहत कार्यों की सराहना की डब्यूएचओ ने | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सूनामी आपदा से उबरने के भारत सरकार के अब तक के प्रयासों की सराहना की है. संगठन ने कहा है कि भारत सरकार ने जिस प्रबंधन के साथ इस आपदा से उबरने के प्रयास किए हैं, वो संतोषजनक हैं. ग़ौरतलब है कि भारत ने 26 दिसंबर को आई इस आपदा से निपटने के लिए अपने संसाधनों पर ही निर्भर रहने की बात कही थी और किसी भी तरह के अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता से इंकार किया था. संगठन की प्रवक्ता पूनम सिंह ने बताया, "संगठन के महानिदेशक ने ख़ुद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है और चलाए जा रहे राहत कार्यों को संतोषजनक पाया है." उन्होंने कहा, "हालांकि पुनर्वास से लेकर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता और संक्रमण के चलते पेट और सांस की बिमारियों की आशंका अभी बनी है और इसके साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है पर भारत सरकार मानकों के मुताबिक काम कर रही है और ऐसे मामलों की ख़बरें बहुत कम हैं." संगठन के हवाले से बताया गया कि उनका मुख्य ध्यान प्रभावित क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं पर है और इसके लिए वो सरकार और स्थानीय संसाधनों को सहयोग दे रहे हैं. इसके लिए संगठन की ओर से राहत कार्यों के दौरान ध्यान रखने वाले निर्देश भी जारी किए गए हैं. मनोवैज्ञानिक चुनौतियाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से सूनामी प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य किए जा रहे हैं. संगठन के एक अन्य अधिकारी, डॉक्टर विजय चंद्रा ने बताया, "हम मुख्य रूप से प्रभावित लोगों को मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहयोग देने के प्रयास में लगे हैं." चंद्रा बताते हैं, "इतनी बड़ी घटना का लोगों पर भावनात्मक रूप से काफ़ी बुरा असर पड़ा है और लोगों में आत्महत्या की इच्छा और जीवन से अरुचि जैसी समस्याएँ देखने को मिल रही हैं." उन्होंने बताया कि इस घटना का सबसे बुरा प्रभाव बच्चों की मानसिकता पर पड़ा है और उनमें खाने के प्रति अरुचि देखने को मिल रही है. यह पूछे जाने पर कि क्या संगठन भारत को किसी मानकीकृत सूनामी सिग्नल सिस्टम विकसित करने में मदद करेगा, अधिकारियों ने बताया कि इस दिशा में भारत सरकार अभी अपने स्तर पर ही प्रयास कर रही है पर आवश्यकता पड़ने पर संगठन सरकार को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है. |
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