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सूनामी से बढ़ेगी पर्यटन की उम्मीद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह पर सूनामी लहरों के कहर ने पर्यटन उद्योग को ख़ास नुकसान तो पहुंचाया पर आने वाले दिनों में सूनामी के कारण ही पर्यटन बढ़ने की उम्मीद भी है. अंडमान के पर्यटन विभाग के मुताबिक सूनामी लहरों के आने के समय द्वीप पर क़रीब 3000 पर्यटक थे, जिनमें 90 फीसदी भारतीय और बाकी विदेशी थे. लेकिन बिगड़े हालात के मद्देनज़र उन्हें हवाई जहाज़ से भारत के सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया. पूर्व सांसद विष्णुपडा रे का कहना है, " दहशत के कारण वे वापस चले गए जिससे पर्यटन विभाग को काफी नुकसान हुआ." बे आईलैंड रिसोर्ट के जनरल मैनेजर, मनीष सेठ कहते हैं, "इस साल पर्यटन से हमें अच्छे लाभ की उम्मीद थी, लेकिन सूनामी ने सब गड़बड़ कर दिया." हालाँकि भारत और दूसरी जगहों से आए पत्रकारों ने कुछ हद तक पर्यटकों से हुए नुकसान की खानापूर्ती की, लेकिन यह पर्याप्त नहीं था. पिछले बीस सालों में अंडमान निकोबार में आने वाले पर्यटकों की संख्या में इज़ाफा हुआ था. 1980 में जहाँ केवल 10,000 पर्यटक ही इस इलाक़े का रूख करते थे, वहीं 2003 में इनकी संख्या बढ़कर 93,000 हो गई - यानि दस गुना की बढ़ोत्तरी. माना जा रहा था कि 2004 में ये 100,000 की संख्या पार कर जाएगी - लेकिन सूनामी ने सभी आशाओं पर पानी फेर दिया. ऐसे में अगर माना जाए कि एक देसी पर्यटक एक दिन में क़रीब 500 रूपये खर्च करता है और विदेशी इससे दोगुना, तो सूनामी से हुआ नुकसान क़रीब दो से तीन करोड़ आंका जाएगा. दूसरे पर्यटन स्थलों के मुक़ाबले भले ही ये कम लगे, मगर चरमराते स्थानीय पर्यटन उद्योग के लिए ये बड़ी क्षति है. दूसरा रूप लेकिन इस त्रासदी का एक दूसरा रूप भी सामने आया है. जहाँ एक ओर हज़ारों पर्यटक घबरा कर वापस जा रहे थे, वहीं हैवलॉक द्वीपों पर रह रहे 30 युवा पर्यटक वहीं डटे रहे. दरअसल हैवलॉक सूनामी से प्रभावित नहीं हुआ था. इसलिए अफसरों के समझाने के बावजूद वे वापस नहीं गए. कोलकाता में अमरीकी वाणिज्य दूतावास के सौरभ सेन कहते हैं, "उन्होंने कहा कि वापस जाओ और हमें चैन से रहने दो." हैवलॉक और नील द्वीप स्कूबा डाईविंग और कई अन्य वॉटर स्पोर्ट्स के शौकीनों के लिए जन्नत है. टाईम मैगज़ीन ने भी हैवलॉक द्वीप के तटों को दुनिया के बेहतरीन तटों में से एक माना है. लेकिन कई जगहों पर कबीले वासियों के होने से इनमें से कई द्वीप पर्यटकों की पहुँच से बाहर हैं, तो कुछेक में पर्याप्त सुविधाओं की कमी है.
अगर इन मुश्किलों को सुलझा लिया जाए तो सूनामी इन द्वीपों के लिए एक आशा की किरण भी साबित हो सकती है. सकारात्मक पहलू सरकार के जन-संपर्क अधिकारी, राना मैथ्यू का मानना है, " इससे पहले कभी भी सभी देशों से इतने पत्रकार यहाँ नहीं आए. इससे हमारे द्वीपों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है. सूनामी से उपजी घबराहट ख़तम होने के बाद इससे पर्यटन को परोक्ष रूप से बढ़ावा ज़रूर मिलेगा." पूरव सांसाद विष्णुपडा रे का मानना है कि इसे भुनाने के लिए सरकार को मूलभूत ढांचे में सुधार करना होगा. साथ ही उद्योगपतियों को पर्यटन की बेहतर सुविधाऐं प्रदान करने के लिए त्रृण की व्यवस्था करनी होगी और चेन्नई और कोलकाता से हवाई किराये में कमी करनी चाहिए, क्योंकि भविष्य में पर्यटन बहुत बढ़ेगा. वर्तमान सांसद मनोरंजन भक्त कहते हैं, "पर्यटन उद्योग यहाँ का भविष्य है." लेकिन इस भविष्य के लिए सरकार को कई अहम क़दम उठाने की आवश्यकता है. फिलहाल अधिकारियों ने एक नई योजना का अनावरण किया है जिसके तहत पर्यटन को सबसे ऊपर रखा गया है. लेफ्टिनेंट गवर्नर राम कापसे कहते हैं, " प्रशासन पर्यटन पर ज़्यादा ध्यान देगा जिससे द्वीप की आर्थिक स्थिति में सुधार हो और द्वीपवासियों को रोज़गार मिले." |
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