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सोमवार, 17 जनवरी, 2005 को 16:06 GMT तक के समाचार
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धनी देश टालमटोल नहीं करें:ऑक्सफ़ैम
ऑक्सफ़ैम
ऑक्सफ़ैम कई देशों में मदद कर रहा है
अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठन ऑक्सफ़ैम ने कहा है कि सूनामी लहरों से हुई तबाही पर पार पाने के लिए यह ज़रूरी है कि पश्चिमी देश घोषित सहायता राशि उचित समय पर मुहैया कराएँ और राशि देने में टालमटोल नहीं करें.

ऑक्सफ़ैम की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन देशों ने संयुक्त राष्ट्र की मानवीय अपील के जवाब में राहत देने का वादा किया है उसमें अब भी 26 प्रतिशत राहत राशि नहीं पहुँची है और डर यह भी है कि कुछ देश अपने शुरू के वादे पूरे नहीं करें.

ऑक्सफ़ैम ने सभी देशों से अनुरोध किया है कि वे अपने वादे का धन जितना जल्दी हो सकें, दे दें.

पहले भी ऐसा हो चुका है जब प्राकृतिक आपदा के वक़्त राहत देने का वादे तो किए गए लेकिन वे पूरे नहीं किए गए, ऐसा ईरान के बाम में आए भूकंप के वक़्त भी हो चुका है.

ऑक्सफ़ैम ने उन सभी देशों की तारीफ़ की है जिन्होंने सूनामी लहरों की तबाही के समय आगे आकर मदद का वादा किया था.

लेकिन ऑक्सफ़ैम ने आगाह भी किया है कि धनी देश राहत पहुँचाने, व्यापार और क़र्ज़ रियायतों के मामले में टालमटोल
कर रहे हैं. ये ऐसे क़दम हैं जिनसे प्रभावित देशों को सूनामी की तबाही से उबरने में दीर्घकालीन मदद मिलेगी.

ऑक्सफ़ैम ने कहा है कि कुछ धनी देशों ने क़र्ज़ की उगाही माफ़ करने के बजाय सिर्फ़ कुछ समय के लिए अस्थाई रूप से स्थगित भर कर दी है.

क़र्ज़ उगाही

ऑक्सफ़ैम के प्रवक्ता मैक्स लॉसन ने बीबीसी के रेडियो-4 से कहा, "सूनामी लहरों से प्रभावित देशों को दरअसल सारे धन का भुगतान करना ही पड़ेगा जोकि 12 महीने में शुरू हो जाएगा."

लेना और देना...
 ऑक्सफ़ैम चाहता है कि कुछ बहुत ग़रीब देशों पर क़र्ज़ की उगाही रद्द कर दी जाए अन्यथा ऐसी स्थिति हो जाएगी जहाँ हम कुछ सहायता तो दे रहे हैं लेकिन हम क़र्ज़ की उगाही भी कर रहे हैं. यह एक हाथ से देना और दूसरे से लेने जैसा है.
मैक्स लॉसन

उन्होंने कहा, "ऑक्सफ़ैम चाहता है कि कुछ बहुत ग़रीब देशों पर क़र्ज़ की उगाही रद्द कर दी जाए अन्यथा ऐसी स्थिति हो जाएगी जहाँ हम कुछ सहायता तो दे रहे हैं लेकिन हम क़र्ज़ की उगाही भी कर रहे हैं. यह एक हाथ से देना और दूसरे से लेने जैसा है."

लॉसन ने कहा कि ऑक्सफ़ैम चाहता है कि दान देने वाले देश यह अनुमान लगाएँ कि सूनामी लहरों से प्रभावित किस देश को कितनी सहायता की ज़रूरत है और बाक़ी क़र्ज़ की उगाही की जा सकती है.

ऑक्सफ़ैम और कुछ अन्य संगठनों की इस चिंता को बल ईरान के बाम में दिसंबर 2003 में आए भूकंप के मामले में हुई वादाख़िलाफ़ी से मिलता है.

संगठनों का कहना है कि बाम के भूकंप के बाद पुनर्निर्माण कार्यों के लिए के लिए एक एरब डॉलर की मदद का वादा किया गया था लेकिन वादा करने वाले देशों ने यह धन मुहैया ही नहीं कराया.

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता प्रमुख जॉन इगेलैंड ने पिछले सप्ताह कहा था कि सूनामी प्रभावितों की मदद के लिए अनेक देश ने 71 करोड़ 70 लाख डॉलर देने की पेशकश कर चुके हैं और उन्होंने अगले छह महीनों में धन देने का वादा भी किया है.

लेकिन अभी यह 97 करोड़ 70 लाख डॉलर की उस रक़म का 73 प्रतिशत ही है जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने विभिन्न देशों से अनुरोध किया था.

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