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गुरुवार, 20 जनवरी, 2005 को 04:41 GMT तक के समाचार
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निकोबार द्वीप से हज़ारों का पलायन

अंडमान निकोबार के लोग
कुछ लोगों में दहशत फैल गई है
26 दिसंबर को हिंद महासागर में आए भूकंप और उसके बाद उठी भयावह सूनामी लहरों की तबाही से परेशान होकर भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह से बड़े पैमाने पर लोग भागने लगे हैं.

क़रीब सात हज़ार लोग अपना सामान बाँधकर द्वीप समूह से निकलने लगे हैं.

अंडमान निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में जहाज़रानी सेवा के निदेशक समीर कोहली बताते हैं, "ऐसे कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं कि यहाँ से बाहर जाने का यह सिलसिला कहीं रुकने वाला है."

इन लोगों में से ज़्यादातर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की तरफ़ भाग रहे हैं, कुछ अन्य लोग देश के अन्य भागों की तरफ़ भी जा रहे हैं.

पोर्ट ब्लेयर से कोलकाता और चेन्नई को जाने वाले जहाज़ों में बढ़ रही भीड़ को संभालने में कर्मचारियों को ख़ासी मुश्किल का सामना करना पड़ा है.

एक टिकट क्लर्क बी श्रीनिवासन का कहना था, "मेरे सभी साथी बेहद परेशान हैं लेकिन हमें यह स्वीकार करना ही पड़ेगा. यहाँ लोग वास्तव में बहुत डरे हुए हैं और यहाँ से चले जाना चाहते हैं."

अंडमान निकोबार की क़रीब चार लाख की आबादी में तमिल और बंगाली बड़ी संख्या में हैं.

अधिकारियों का कहना है कि भूकंप के बाद समुद्र का जल स्तर बढ़ने, द्वीप समूह के धँसने और बहुत से तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का ख़तरा बढ़ने की आशंका के बीच ये लोग वहाँ से निकल रहे हैं.

लगातार झटके

26 दिसंबर के भूकंप के बाद भी अंडमान निकोबार द्वीप समूह में कम से कम 200 भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं, इनमें से कुछ तो रिक्टर पैमाने पर छह अंक की तीव्रता वाले भी थे.

डर तो है
 लोगों को शक है कि पृथ्वी के भीतर कुछ परिवर्तन हो रहे हैं जिनका असर द्वीप समूह पर भी पड़ेगा. वे नहीं समझते कि वहाँ रुके रहना सुरक्षित है. लेकिन मेरा ख़याल है कि ज़्यादातर लोग सिर्फ़ डरकर यहाँ से चले जाना चाहते हैं.
पत्रकार अशीम पोद्दार

पोर्ट ब्लेयर से प्रकाशित अख़बार डेली टेलीग्राम के संपादक अशीम पोद्दार का कहना था, "लोगों को शक है कि पृथ्वी के भीतर कुछ परिवर्तन हो रहे हैं जिनका असर द्वीप समूह पर भी पड़ेगा. वे नहीं समझते कि वहाँ रुके रहना सुरक्षित है. लेकिन मेरा ख़याल है कि ज़्यादातर लोग सिर्फ़ डरकर यहाँ से चले जाना चाहते हैं."

लेकिन बहुत से लोग इन तमाम आशंकाओं के बावजूद वहाँ से बाहर नहीं जाना चाहते हैं.

एक बंगाली क्लर्क सुनंदा दास का कहना था, "हम हर वक़्त झटके महसूस करते रहते हैं, चीज़ें गिरती रहती हैं, हम बहुत डरे हुए महसूस करते हैं."

"मेरी यहाँ अच्छी नौकरी है. हम देश के किसी अन्य हिस्से में जाएंगे तो वहाँ हमारे पास कुछ नहीं होगा. इसलिए मैं अपने परिवार के साथ यहीं रुकूंगी और हो सकता है कि यहीं मेरी शादी भी हो."

अंडमान निकोबार द्वीप समूह के प्रशासन ने इन लोगों को रोकने की कोई कोशिश नहीं की है, हालाँकि केंद्र सरकार समझती है कि लोगों को इस तरह वहाँ से भागने से रोका जाना चाहिए.

केंद्रीय गृह सचिव धीरेन्द्र सिंह ने एक पत्रकार सम्मेलन में कहा, " इस तरह की तबाही में उन लोगों के डर को समझा जा सकता है लेकिन हमें उन्हें जल्दबाज़ी में कोई फ़ैसला करने से रोकने के लिए समझाना चाहिए."

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