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शुक्रवार, 05 जनवरी, 2007 को 08:27 GMT तक के समाचार
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उत्तराखंड में विधायकों का ‘रिपोर्ट कार्ड’

उत्तराखंड विधानसभा
उत्तराखंड में 21 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं
स्कूल और कॉलेज के छात्रों के रिपोर्ट कार्ड के बारे में सबने सुना होगा लेकिन अब सत्ता और नेता भी पीछे नहीं हैं. उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के सभी 40 विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है.

ये रिपोर्ट कार्ड ही तय करेंगे कि किसे टिकट दिया जाए और किसे नहीं.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हरीश रावत का कहना है, "इस बात की जाँच की जाएगी कि इन पाँच सालों में किस विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र में विकास का कितना काम किया, विधायक निधि का कैसा उपयोग किया और सरकारी योजनाओं को कितनी मुस्तैदी से लागू करवाया."

 अगर सही-सही मूल्यांकन किया जाए तो आधे वर्त्तमान विधायकों के टिकट कट जाएंगे. प्रदर्शन के इस इम्तिहान में कुछ ही लोग पास हो पाएंगे
एक विधायक की टिप्पणी

विधायकों के मूल्यांकन का ये जिम्मा राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष विजय बहुगुणा, 24 सूत्री कार्यक्रम के अध्यक्ष सतपाल महाराज और संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा ह्रदयेश को सौंपा गया है.

प्राप्त आँकड़ों के अनुसार अगर विधायक निधि का ही आकलन किया जाए तो सालाना मिलने वाले सवा करोड़ रुपए में से काँग्रेस के आधे से ज़्यादा विधायकों ने औसतन 45 प्रतिशत ही खर्च किया है और बाकी रक़म उनके खाते में यूँ ही पड़ी है.

मतलब साफ है या तो उनके पास योजनाएं नहीं थीं या फिर उन्होंने इसके उपयोग में रूचि नहीं ली.

'महज नौटंकी'

अगर विकास कार्यों में सिर्फ़ सड़क और पुल का निर्माण देखें तो मंत्रिमंडल के वरिष्ठ नेताओं इंदिरा ह्रदयेश ने 47 करोड़, नवप्रभात ने करीब एक अरब रुपए और किशोर उपाध्याय ने 76 करोड़ रुपए के सड़क और पुल स्वीकृत किए और बनवाए.

बाकी विधायकों का ग्राफ कोई उल्लेखनीय नहीं है. सवाल ये है कि ये आँकड़े भी सिर्फ कागज़ों में ही हैं या जनता तक इनका लाभ पहुँचा है, इसका सही मूल्यांकन संबंधित क्षेत्र की जनता ही कर सकती है.

 इस बात की जाँच की जाएगी कि इन पाँच सालों में किस विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र में विकास का कितना काम किया, विधायक निधि का कैसा उपयोग किया और सरकारी योजनाओं को कितनी मुस्तैदी से लागू करवाया
हरीश रावत

एक तरफ जहाँ विधायक साँस रोके अपने रिपोर्ट कार्ड का इंतज़ार कर रहे हैं, वहीं पार्टी के अंदर इस कसरत से काफ़ी खलबली भी है और कुछ असंतोष भी.

नाम गुप्त रखने की शर्त्त पर कांग्रेस के ही एक विधायक का कहना है, " ये महज एक नौटंकी है और अपनी अहमियत जताने के लिए पार्टी के नेता ये शोशेबाजी कर रहे हैं ताकि टिकट के लिए लोग उनके आगे-पीछे घूमें."

इसी तरह से एक दूसरे विधायक की टिप्पणी है," अगर सही-सही मूल्यांकन किया जाए तो आधे वर्त्तमान विधायकों के टिकट कट जाएंगे. प्रदर्शन के इस इम्तिहान में कुछ ही लोग पास हो पाएंगे."

हालांकि पार्टी इसपर काफ़ी गंभीर है और मकर संक्रांति के दिन बाकायदा एक समारोह में रिपोर्ट कार्ड जारी किया जाएगा.

उधर प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से एक क़दम आगे बढ़कर शायद ये मान लिया है कि उसके सभी 19 विधायकों का प्रदर्शन अच्छा रहा है और ऐसी चर्चा है कि सभी विधायकों को दोबारा टिकट दे दिया जाएगा.

भाजपा के प्रत्याशियों की पहली सूची के अगले हफ़्ते तक जारी होने की उम्मीद है.

उत्तराखंड में 21 फरवरी को वोट डाले जाने हैं और विधायकों का असली इम्तिहान भी शायद वही होगा.

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