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अधिकारियों को 'बात कम करने' का निर्देश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
'बातें कम काम ज़्यादा' के आदर्श वाक्य वाला फ्रेम किसी भी सरकारी दफ़्तर में टंगा हुआ देखा जा सकता है लेकिन ऐसा लगता है कि उत्तरांचल के बड़े प्रशासनिक अधिकारी 'काम कम बातें ज़्यादा' के सिद्धांत में यकीन रखते हैं. एक साल में राज्य के बड़े अफ़सरों ने एक करोड़ रूपए से ज़्यादा की बातें की हैं.चाहे सरकारी आवास पर लगे फोन हों या फिर दफ़्तर की ओर से मिला मोबाइल, 23 अफ़सरों के भारी-भरकम टेलीफोन बिल सरकार के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं. राज्य के पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता रमेश पोखरियाल निशंक कहते हैं, "इससे ये पता चलता है कि राज्य में नौकरशाही किस हद तक बेलगाम हो चुकी है. सिर्फ मंत्री ही नहीं अफ़सर भी जमकर जनता के पैसे का दुरूपयोग कर रहे हैं और बढ़ते गैर योजना खर्च के कारण घाटा बढ़कर 16 हज़ार करोड़ रूपए तक पहुँच गया है." राज्य संपत्ति विभाग के आँकड़ों के अनुसार पिछले 11 महीनों में इन वरिष्ठ अफ़सरों के सरकारी आवास पर लगे टेलीफोन बिल के लिए क़रीब 45 लाख रूपए का भुगतान किया गया है और मोबाइल फोन के लिए लगभग 55 लाख रुपए अदा किए गए हैं. सबसे ज़्यादा बात करने वालों में प्रदेश के पूर्व पर्यटन सचिव एनएन प्रसाद और पूर्व मुख्य सचिव एम रामचंद्रन शामिल हैं. कांग्रेस में खलबली राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और इस मामले के उजागर होने से सत्ताधारी कांग्रेस में भी खलबली है. राज्यमंत्री सुबोध उनियाल कहते हैं," हर विभाग की अपनी ज़रूरत होती है और उत्तरांचल जैसे छोटे राज्य में जहां मंत्री और अफ़सर जनता के लिए सहज उपलब्ध बन गए हैं टेलीफ़ोन का उपयेग भी उसी अनुपात में बढ़ गया है.लेकिन चिंता की बात तब हो जाती है जब निजी ज़रूरतों के लिए सरकारी सुविधाओं का दुरूपयोग हो." राज्य संपत्ति विभाग ने भविष्य में ऐसे किसी दुरूपयोग को रोकने के लिए एक आदेश जारी करके अफ़सरों को निर्देश दिए हैं कि टेलीफोन और मोबाइल का सीमित उपयोग किया जाए. विभाग ने लैंडलाइन और मोबाइल से बात करने की सीमा निर्धारित कर दी है और ये निर्देश दिया गया है कि अग़र इस सीमा से ज़्यादा बिल आया तो उसका भुगतान खुद ही करना होगा. हालाँकि इस आदेश को लोग एक खानापूर्ति मानते हैं. पेशे से प्रोफ़ेसर चंदन सिंह रावत कहते हैं," अब भले ही सीमा तय कर दी जा रही है लेकिन जो पैसा फिजूल ख़र्च हुआ उसकी भरपाई भी इन अफ़सरों को ही करनी चाहिए." इसके पहले अफ़सरों के लगातार हो रहे विदेश दौरों और कथित तौर पर कांग्रेसी नेताओ को रेवड़ी के तौर पर बाँटे जा रहे लाभ के पदों के मामले में भी सरकार मुश्किल में पड़ चुकी है. | इससे जुड़ी ख़बरें विरासत को बचाने और बेचने की नई कोशिश06 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नरभक्षी बाघ को पकड़ने के प्रयास03 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस टिहरी बांध से बिजली उत्पादन शुरु17 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस चारों धामों के लिए हवाई सेवा की शुरुआत02 मई, 2006 | भारत और पड़ोस एन डी तिवारी की इस्तीफ़े की पेशकश04 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस टिहरी में रुकी भागीरथी की धारा01 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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