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चारों धामों के लिए हवाई सेवा की शुरुआत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिमालय की ऊंची पर्वतमालाओं में स्थित चार धाम के लिए इस साल नियमित हवाई सेवा शुरू हो रही है. चार तीर्थों बदरीनाथ,केदारनाथ,गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन की इस यात्रा में हर साल देश-विदेश से 10 लाख से भी ज्यादा यात्री आते हैं. ये यात्रा मोटे तौर पर मई से अक्तूबर तक चलती है. गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुल चुके हैं और बदरीनाथ और केदारनाथ के कपाट 4 मई को खुल रहे हैं. बहुत ज्यादा बर्फबारी और ठंड के कारण ये तीर्थ शीतकाल में लगभग 6 महीने के लिए बंद कर दिए जाते हैं. अब तक शारीरिक अक्षमता, अधिक उम्र या समय की कमी की वजह से कई लोग चाहकर भी यहां नहीं आ सकते थे क्योंकि ये पहाड़ी रास्ते काफी दुर्गम हैं. यहां तक कि केदारनाथ के लिए 11 किलोमीटर का कच्चा रास्ता है जो पैदल या खच्चर से ही पूरा किया जा सकता था. ऐसे लोग शायद अब अपनी मुराद पूरी कर सकेंगे और सामान्य यात्रियों के लिए भी अब ये सफ़र आरामदायक हो जाएगा. उत्तरांचल के पर्यटन सचिव पीसी शर्मा के अनुसार लोगों को बेहतरीन और सस्ती हवाई सेवा उपलब्ध कराने के लिए ठोस उपाय किए गए हैं. आरामदायक यात्रा तीन एअरलाइंस पवनहंस, जैक्सन और प्रभातम एविएशन बड़े हेलीकॉप्टर की सुविधा लेकर यहां आ रहे हैं. इनके एक ट्रिप की कीमत 8 से 10 हजार होगी और एक दिन में इनके चार से पांच फेरे होंगे. शुरू में हवाई सेवा बद्रीनाथ और केदारनाथ के लिए होगी और बाद में इसका गंगोत्री और यमुनोत्री तक विस्तार किया जाएगा. इसके पहले भी केदारनाथ के लिए पवनहंस ने प्रयोग के तौर पर कुछ उड़ानें शुरू की थीं जो काफी लोकप्रिय रही थीं. लेकिन पर्वतीय इलाकों में अक्सर बादल और मौसम की गड़बड़ी की वजह से सैलानियों को काफी इंतजार करना पड़ता था.ये आशंका इस बार भी बनी रहेगी. अगर पर्यटन अधिकारियों की मानें तो बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों ने पहले से ही बुकिंग करा ली है. हालांकि गुजरात के परिमल भट्ट जैसे कुछ यात्रियों का ये भी मानना है," जब तक कष्ट नहीं उठाए जाता तब तक तीर्थ का फल नहीं मिलता. मैं तो बद्रीनाथ साधारण रास्ते से ही जाऊंगा. अगर भगवान के दर्शन के लिए भी आदमी आराम की सोचेगा तो ये तो स्वार्थ होगा." कहा जाता है कि बद्रीनाथ धाम में स्वयं आदि गुरू शंकराचार्य ने विष्णु मंदिर की स्थापना की थी और गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों की स्थापना गढ़वाल नरेश ने की थी. इसी तरह से केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में एक है. | इससे जुड़ी ख़बरें बद्रीनाथ मंदिर में दक्षिण के पुजारी24 मई, 2005 | भारत और पड़ोस विवादों के बीच बद्रीनाथ के कपाट खुले 14 मई, 2005 | भारत और पड़ोस तीर्थयात्रियों को जोशीमठ लाया गया08 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस उत्तरांचल बस दुर्घटना में 25 मरे16 जून, 2002 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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