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माओवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तरांचल पुलिस ने नैनीताल ज़िले के मैदानी इलाक़ों में संदिग्ध माओवादियों की तलाश शुरू कर दी है. हंसपुर खत्ता गाँव से ख़बरें आई हैं कि कुछ दिन पहले वहाँ क़रीब 15 लोग पहुँचे और उन्होंने गाँव वालों से सहयोग की अपील की. कहा जा रहा है कि इन लोगों ने ख़ुद को माओवादी बताया. ये ख़बर मिलने के बाद से पूरे ज़िले की पुलिस सतर्क हो गई है. नैनीताल ज़िले के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इलाक़े के वनरक्षक ने भी जंगल में दो शिविर देखने की बात कही. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विजय साल्वे ने बीबीसी को बताया कि अभी बहुत पुख़्ता तौर पर यह बात सामने नहीं आई है कि इन शिविरों में रह रहे लोग माओवादी ही थे. नेपाल में 1996 के बाद से ही माओवादी विद्रोहियों ने सरकार के ख़िलाफ़ हथियारबंद लड़ाई चला रखी है. नैनीताल ज़िले के जिस इलाक़े में इस बार माओवादियों के नज़र आने की बात कही जा रही है, वह नेपाल सीमा से ज़्यादा दूर नहीं है. पिछले साल केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि सीमापार से आने वाले माओवादी कुमाऊँ के पिथौरागढ़ ज़िले के कुछ इलाक़ों में शरण लेते हैं. लेकिन अभी तक बहुत ठोस रूप से ये बात सिद्ध नहीं हो पाई है. |
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