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मज़दूर संगठनों की देशव्यापी हड़ताल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सत्ताधारी यूपीए सरकार की कथित जनविरोधी आर्थिक नीतियों के विरोध में घोषित मज़दूर संगठनों की देशव्यापी हड़ताल का पश्चिम बंगाल और केरल में असर दिखने को मिला. इस हड़ताल को वामपंथी दलों का समर्थन मिला लेकिन कांग्रेस समर्थित मज़दूर संगठन इंटक और आरएसएस समर्थित बीएमएस इसमें शामिल नहीं हुए. बीबीसी संवाददाताओं के अनुसार हड़ताल का असर वामदल शासित राज्यों पश्चिम बंगाल और केरल में देखने को मिला और वहाँ यातायात बाधित हुआ. बैंगलोर और चेन्नई में ऑटोरिक्शा नहीं चल रहे थे लेकिन जनजीवन बाधित नहीं हुआ. मुंबई में भी हड़ताल का असर दिखाई नहीं दिया. हड़ताल कर रहे मज़दूर संगठनों ने आरोप लगाए कि केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार लोगों की तकलीफ़ की ओर ध्यान नहीं दे रही है और बढ़ती क़ीमतों पर लगाम लगाने के लिए क़दम नहीं उठा रही है. उल्लेखनीय है कि केंद्र की यूपीए सरकार को वामदल बाहर से समर्थन दे रहे हैं. असर कोलकाता से बीबीसी संवाददाता ने बताया कि हड़ताल के दौरान सड़क पर सार्वजनिक यातायात के कोई साधन नहीं थे. दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी बंद रहे. सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) से जुड़े प्रतिष्ठानों को हड़ताल से अलग रखा गया था. इसी तरह से केरल में बसें, टैक्सियाँ और ट्रकें नहीं चलीं. हड़ताल के दौरान किसी भी राज्य से हिंसा की कोई ख़बरें नहीं मिलीं. | इससे जुड़ी ख़बरें हड़ताल से जनजीवन प्रभावित हुआ05 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस टाटा को ज़मीन देने पर प्रदर्शन जारी03 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस तेल मूल्य वृद्धि के ख़िलाफ़ हड़ताल13 जून, 2006 | भारत और पड़ोस मुंबई में बसों की हड़ताल21 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस निजीकरण के विरोध में हड़ताल 31 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस वामपंथी संगठनों की आज हड़ताल28 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस बीमा कर्मचारी दो दिन की हड़ताल पर23 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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