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तेल मूल्य वृद्धि के ख़िलाफ़ हड़ताल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली सहित कई राज्यों में वामपंथियों के साथ कई अन्य दलों ने पेट्रोल और डीज़ल के दामों में की गई वृद्धि के ख़िलाफ़ मंगलवार को विरोध दिवस मनाया. इसके तहत रैलियाँ निकाली गईं और कई जगहों पर चक्का जाम किए गए. दिल्ली, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे वामदल शासित राज्यों के अलावा तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश और आँध्र प्रदेश में इसका असर देखने को मिला. वामदलों ने कहा है कि जब तक तेल के दामों में वृ्ध्दि वापिस नहीं ली जाती उनका आंदोलन जारी रहेगा. वामपंथी दलों की इस हड़ताल को समाजवादी पार्टी, तेलगुदेशम पार्टी और असमगण परिषद भी समर्थन दे रहे थे. दिल्ली में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एबी बर्धन सहित सीताराम येचुरी, अबनी रॉय और देबब्रत बिश्वास जैसे बड़े नेताओं ने दिल्ली में गिरफ़्तारियाँ दीं. वामपंथी दल क़ीमत बढ़ाने के बजाए पेट्रोलिएम पदार्थों पर लागू सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क में कटौती करने की माँग कर रहे हैं. ग़ौरतलब है कि पिछले सप्ताह केंद्र सरकार ने पेट्रोल की क़ीमत में चार रुपए प्रति लीटर और डीजल की क़ीमतों में दो रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी करने का फ़ैसला किया था. वामपंथी कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र की यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं. दिल्ली में हज़ारों लोगों की इस रैली को संबोधित करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने कहा कि केंद्र सरकार जहां अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ती कीमतों के चलते करों के ज़रिए मुनाफ़ा कमा रही है वहीं कीमतों में हुई वृद्धि का सारा भार उपभोक्ताओँ पर डाल रही है. उनका कहना है कि टैक्स में होने वाली बढ़ोत्तरी से सरकार के खजाने में 25 हज़ार करोड़ की राशि जमा हुई है. इधर केंद्र शासित राज्य सरकारों ने बिक्री कर में कटौती कर क़ीमतों को कुछ कम करने का प्रयास किया है. लेकिन वामपंथी इससे संतुष्ट नहीं है और वे केंद्रीय करों में कटौती चाहते हैं. सीपीएम के वरिष्ठ नेता नीलोत्पल बसु ने बीबीसी से बातचीत में कहा, " कांग्रेस अपने शासन वाले राज्यों में बिक्री कर घटा कर जनता को भ्रमित कर रही है. अभी पेट्रोल पर कुल 57 प्रतिशत केंद्रीय कर लगता है. इसमें कमी ज़रूरी है." सरकार का इनकार दूसरी ओर पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने साफ़ कर दिया है कि मूल्य वृद्धि वापस लिए जाने की संभावना नहीं है. सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की बढ़ती क़ीमतों के कारण ऐसा करना पड़ा है. पेट्रोल और डीजल की क़ीमतों में हुई बढ़ोत्तरी के बाद तेल कंपनियों को अतिरिक्त 9200 करोड़ रुपए मिलेंगे. लेकिन तेल कंपनियों का आकलन है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतें बढ़ने से उन्हें 2006-07 में क़रीब 73,500 करोड़ रुपए के राजस्व का नुक़सान होगा. पिछले साल सितंबर में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी की थी. लेकिन मार्च 2002 से कैरोसिन की क़ीमतें नहीं बढ़ी हैं जबकि नवंबर, 2004 से एलपीजी की क़ीमतों में कोई बढोत्तरी नहीं की गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का विरोध07 जून, 2006 | भारत और पड़ोस 'मूल्य वृद्धि वापस लेनी होगी'11 जून, 2006 | भारत और पड़ोस तेल मूल्य बढ़ाने पर आंदोलन की चेतावनी01 जून, 2006 | भारत और पड़ोस पेट्रोल तीन, डीज़ल दो रुपए महँगा06 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस रसोई गैस की कमी नहीं: अय्यर06 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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