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'मूल्य वृद्धि वापस लेनी होगी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में वामपंथी दलों ने कहा है कि देश में जनता के आंदोलन के ज़रिए वो सरकार को पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने का फ़ैसला वापस लेने के लिए मज़बूर कर देंगे. कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे माकपा के वरिष्ठ नेता निलोत्पल बसु ने 'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के जवाब देते हुए कहा कि दोनों पेट्रोलिएम पदार्थों के दाम बढ़ाने का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा और इसके ख़िलाफ़ जनआंदोलन शुरु किया जाएगा. दूसरी ओर कांग्रेस के सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के कारण घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी लाज़मी तेल की राजनीति दाम बढ़ाने का विरोध करने के साथ साथ सरकार को समर्थन जारी रख कर क्या वामपंथी दल अपना राजनैतिक हित साधने की कोशिश कर रहे हैं, एक श्रोता के इस सवाल पर बसु ने कहा "हमने सरकार का विरोध करते हुए ही कई जनविरोधी नीतियों को रोकने में सफलता हासिल की है. हमारे विरोध के चलते ही केरोसिन और रसोई गैस के दाम नहीं बढ़े हैं." उनकी इस दलील पर कांग्रेसी नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कांग्रेस शासित राज्यों की तरह वामपंथी शासन वाले राज्य सरकारों से भी पेट्रोल और डीज़ल पर बिक्री कर कम करने की सलाह दी जिसे बसु ने सिरे से ख़ारिज कर दिया. सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा कि कीमत नहीं बढ़ाने का दूरगामी असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता. उन्होंने कहा कि सिर्फ़ इसी वर्ष तेल पूल घाटा 77 हजार करोड़ रुपए पर पहुँच सकता है. चतुर्वेदी ने कहा "अगर हम कीमतें नहीं बढ़ाते तो बाद में सरकार के फ़ैसले का विरोध कर रहे यही दल हम पर राजनैतिक लाभ के लिए अर्थव्यवस्था को दाँव पर रखने का आरोप मड़तेते." जोड़ घटाव बसु ने वामपंथी दलों की दलील दोहराते हुए केंद्र सरकार से पेट्रोलिएम पदार्थों पर सीमा शुल्क और उत्पाद कर में कमी करने को कहा ताकि आम जनता पर बोझ कम पड़े. उन्होंने कहा "कांग्रेस अपनी पार्टी के शासन वाले राज्यों में बिक्री कर घटा कर जनता को भ्रमित कर रही है. अभी पेट्रोल पर कुल 57 प्रतिशत केंद्रीय कर लगता है. इसमें कमी ज़रूरी है." बसु ने कहा कि सरकार सब्सिडी नहीं देने वाली.और कर छूट लेने वाली निजी तेल कंपनियों पर कर बढ़ा कर और उपकर कोष में जमा लगभग 60 हज़ार करोड़ रुपए की राशि का इस्तेमाल करके दाम बढ़ाने के फ़ैसले से बच सकती थी. | इससे जुड़ी ख़बरें दोनों सदनों ने दी महाजन को श्रद्धांजलि10 मई, 2006 | भारत और पड़ोस यूपीए पर वामपंथी दलों का दबाव बढ़ेगा11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस तेल मूल्य बढ़ाने पर आंदोलन की चेतावनी01 जून, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार पर बढ़ोत्तरी वापस लेने का दबाव06 जून, 2006 | भारत और पड़ोस पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का विरोध07 जून, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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