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वामपंथी संगठनों की आज हड़ताल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की आर्थिक नीतियों के विरोध में वामपंथी मज़दूर संगठनों ने गुरूवार को हड़ताल का आहवान किया है. ग़ौरतलब है कि वामपंथी दल यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं लेकिन वे सरकार की निजीकरण की योजनाओं और कुछ अन्य आर्थिक सुधारों का विरोध करते हैं. सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के महासचिव एमके पंधे ने कहा, "यह सरकार को एक चेतावनी होगी. अगर सरकार अपनी आर्थिक नीतियों की व्यापक समीक्षा नहीं करती तो हम इससे भी बड़ा क़दम उठाएंगे." उन्होंने कहा, "हम लंबी हड़ताल कर सकते हैं." असर इस हड़ताल से सबसे ज़्यादा हवाई अड्डों के प्रभावित होने की संभावना है क्योंकि ज़्यादातर कर्मचारी दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों के 74 प्रतिशत शेयर निजी हाथों में बेचने की सरकार की योजना का विरोध कर रहे हैं. लेकिन एमके पंधे ने कहा कि बैंकों और बीमा कंपनियों सहित बहुत से क्षेत्रों के कर्मचारी बड़े पैमाने पर हड़ताल करेंगे जिससे सामान्य कामकाज पर व्यापक असर पड़ेगा. हालाँकि कुछ निजी कंपनियों ने अपनी कुछ उड़ानें रद्द करने की घोषणा की है लेकिन सरकार ने कहा है कि सुरक्षा प्रबंध और वायु यातायात नियंत्रण सेवाएँ प्रभावित नहीं होंगी. प्रमुख हवाई अड्डों पर वायु यातायात नियंत्रण और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं में वायु सेना के कर्मचारी लगाए जा रहे हैं. 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए की सरकार बनने के बाद उसके सहयोगी वामपंथी दलों के मज़दूर संगठनों की यह पहली बड़ी हड़ताल है. ऐसी संभावना जताई गई है कि केरल और पश्चिम बंगाल इस हड़ताल से सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे. इन दोनों ही राज्यों में वामपंथी दलों का प्रभाव है. |
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