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ईरान मुद्दे पर वामपंथी दल नाराज़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में ईरान के ख़िलाफ़ मत डालने के मुद्दे पर भारत सरकार को वामपंथी दलों और विपक्षी पार्टियों की तरफ़ से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने सरकार को ईरान के मुद्दे पर अमरीका का साथ देने के ख़तरों से आगाह किया है. पार्टी का कहना है कि अमरीका इस प्रस्ताव का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए कर सकता है. सीपीएम के नेता सीताराम येचुरी ने हैदराबाद में बताया कि वामपंथी दल इस मुद्दे पर यूपीए सरकार का विरोध करेंगे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ईरान मुद्दे पर बुधवार को वामपंथी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई है. सीताराम येचुरी ने भारत के रुख़ पर नाखुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि बुधवार की बैठक में वामपंथी दल अपना विरोध जताएँगे. सीपीएम नेता ने कहा कि "ईरान के ख़िलाफ़ प्रस्ताव का समर्थन करना बहुत बड़ी ग़लती है. जब पाकिस्तान,चीन और श्रीलंका जैसे देश निष्पक्ष रहे तो ऐसे में भारत ने अमरीका का साथ क्यों दिया." सीताराम येचुरी ने कहा कि भारत को सुरक्षा परिषद में ईरान के ख़िलाफ़ प्रस्ताव का विरोध करना चाहिए. मुलाक़ात इस बीच भारत के विदेश सचिव ने भारत में ईरान के राजदूत से मुलाक़ात की है.
ईरान के राजदूत ने कहा कि ईरान का विरोध करने के भारत के फ़ैसले से ईरान को काफ़ी हैरानी हुई है. उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण फ़ैसला बताते हुए कहा कि ये राजनीतिक दबाव के तहत किया गया है. लेकिन भारत दबाव की बात से इनकार करता रहा है. ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने भी कहा है कि भारत के रुख़ से ईरान हैरान है, ख़ास तौर पर तब जब हाल ही में गैस पाइपलाइन को लेकर दोनों देशों के बीच बात चल रही है. ईरान ने उन देशों को चेतावनी दी है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड की बैठक में उसका विरोध किया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान इनमें से कुछ देशों के साथ आर्थिक संबंधों पर फिर से विचार करेगा. |
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