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ईरान पर भारत ने दिया स्पष्टीकरण | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
परमाणु कार्यक्रम के मसले पर ईरान के ख़िलाफ़ मतदान करने के अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए भारत ने कहा है कि इसका अमरीका के साथ हुए परमाणु समझौते का कोई लेना देना नहीं हैं. हालांकि भारत सरकार की इस सफ़ाई को सरकार को समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने अस्वीकार करते हुए कहा है कि ईरान के ख़िलाफ़ मतदान करना ग़लत फ़ैसला था. उल्लेखनीय है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मसले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाने के अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जी एजेंसी के प्रस्ताव पर शनिवार को मतदान हुआ था. इस मतदान में 35 सदस्यों में से 22 सदस्यों ने पक्ष में मतदान किया था, एक देश ने विरोध में वोट डाला था और चीन तथा रुस सहित 12 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था. भारत के बारे में माना जाता था कि वह इस प्रस्ताव के विरोध में है लेकिन उसने इस प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया था. सफ़ाई भारत के विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि भारत ने अपने रुख़ में कोई परिवर्तन नहीं किया है. विदेश विभाग के प्रवक्ता के अनुसार भारत ने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम का समर्थन ही किया है.
इस बयान में इस धारणा को ग़लत बताया गया है कि अमरीकी दबाव में भारत ने ईरान के ख़िलाफ़ जाने का फ़ैसला किया है. आमतौर पर माना जा रहा है कि हाल ही में अमरीका और भारत के बीच हुए परमाणु समझौते के दबाव में भारत ने यह फ़ैसला लिया होगा. उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अमरीका यात्रा के दौरान अमरीका ने भारत पर लगी परमाणु तकनीक की रोक हटा ली थी. इससे पहले भारत खुले रुप से कहता रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सही परिप्रेक्ष्य में देखे और समझे जाने की ज़रुरत है. वामदलों की निंदा सरकार का समर्थन कर रहे वामपंथी दलों ने ईरान के ख़िलाफ़ मतदान करने के भारत सरकार के फ़ैसले का विरोध किया है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि भारत पर अमरीका का दबाव था कि यदि वह ईरान पर स्वतंत्र रुख़ नहीं अपनाता है तो अमरीकी संसद भारत के साथ हुई संधि की पुष्टि नहीं करेगी. पार्टी ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट देने के फ़ैसले को 'शर्मनाक' बताया है. इसी तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि इससे साफ़ होता है कि भारत ने गुटनिरपेक्षता और तीसरी दुनिया के देशों का समर्थन करने की नीति को छोड़ दिया है. |
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