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बीमा कर्मचारी दो दिन की हड़ताल पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के 75 हज़ार बीमा कर्मचारी बुधवार 23 मार्च से दो दिवसीय हड़ताल पर जा रहे हैं. वे बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफ़डीआई की सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत किए जाने का विरोध कर रहे हैं. इससे पहले मंगलवार को भारत के बैंक कर्मचारियों ने भी एफ़डीआई का विरोध करते हुए एक दिन की हड़ताल की थी जिसका व्यापक असर हुआ था. हालांकि बीमा कर्मचारियों की हड़ताल का वैसा सीधा असर नहीं दिखाई देने वाला है जैसा कि बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के बाद दिखाई दिया था. इसके अलावा बीमा कर्मचारी अपना वेतनमान बढ़ाने की भी मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि 2004 से उनके वेतन में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव है. केंद्र की यूपीए सरकार की ओर से इसका प्रस्ताव रखा गया है और इसके लिए संसद में एक विधेयक भी आने वाला है. यूपीए सरकार को समर्थन दे रहे वामपंथी दल पहले से ही इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ हैं और उन्होंने अपनी नाराज़गी से सरकार को अवगत भी करवा दिया है. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पेटेंट विधेयक के मामले में तो आश्चर्यजनक ढंग से वामपंथी दलों ने सरकार को समर्थन देने के लिए हामी भर दी लेकिन बीमा के मामले में उन्हें मनाना आसान नहीं होगा. लेकिन वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने उम्मीद जताई है कि वे वामपंथी दलों को मनाने में सफल हो जाएँगे. |
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