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चिदंबरम को भरोसा, वामदलों को मना लेंगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने विश्वास व्यक्त किया है कि वह बीमा, दूरसंचार और उड्डयन क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने से नाराज़ वामपंथी दलों से बात करके उन्हें समझाने में सफल हो जाएँगे. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए के सांसदों की सोमवार को हुई बैठक में वित्त मंत्री ने कहा कि वह इस बारे में वामपंथी दलों से बात करने के लिए तैयार हैं. चिदंबरम का कहना था कि वह इसके लिए भी तैयार हैं कि वामपंथी दल अपने पक्ष से उन्हें संतुष्ट कर दें. वामपंथी दल इस प्रस्ताव को लेकर काफ़ी नाराज़ हैं और उन्होंने संसद में भी इस प्रस्ताव का विरोध करने का फ़ैसला किया है. इससे पहले वाणिज्य एवं उद्योग संघ (फ़िक्की) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की बैठकों में वित्त मंत्री ने देश के शीर्ष उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए टर्नओवर टैक्स को जायज़ ठहराया मगर ये भी कहा कि अगर बेहतर विकल्प उपलब्ध हो तो वह उस पर विचार करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने के कारण भी इस बैठक में रखे. वित्त मंत्री ने सबसे बड़ी समस्या कार्यक्रमों को अमल में लाने के बताया और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने में उद्योग जगत से सहयोग भी माँगा. चिदंबरम का कहना था कि दूरसंचार क्षेत्र में भले ही औपचारिक रूप से 49 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति थी मगर सही मायने में इस क्षेत्र में 74 प्रतिशत तक निवेश हो रहा था. उनका कहना था कि अब उसे औपचारिक करने से पता चलेगा कि वास्तविक निवेशक कौन है. कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने यूपीए के सांसदों की बैठक की जानकारी दी और कहा कि वामपंथी दल भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मुद्दे को ज़्यादा खींचने के हक में नहीं हैं और न ही उनका सरकार से टकराव का कोई इरादा है. |
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