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परमाणु समझौते पर बातचीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी विदेश उप मंत्री निकोलस बर्न्स भारत और अमरीका के बीच हुए परमाणु सहयोग समझौते पर बातचीत के लिए गुरुवार को भारत पहुँच गए हैं. वो दोनों देशों के बीच जुलाई, 2005 में हुई परमाणु सहमति के संबंध में बातचीत करेंगे. निकोलस बर्न्स भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और विदेश मंत्रालय के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात करेंगे. समझौते के तहत भारत अपनी कुछ परमाणु सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय जाँच के लिए खोलेगा. बदले में अमरीका भारत को असैनिक परमाणु सुविधाओं के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा. सदन की मंज़ूरी ग़ौरतलब है कि अमरीकी उच्च सदन सीनेट ने लंबी बहस के बाद भारत-अमरीका परमाणु समझौते को भारी बहुमत से पारित कर दिया था. संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने जुलाई में इस समझौते को पारित किया था. अब दोनो सदनों में पारित विधेयकों को मिलाया जाएगा और फिर इसे अमरीकी कांग्रेस यानी दोनो सदनों वाली पूरी संसद के समक्ष मतदान के लिए रखा जाएगा. भारत-अमरीका परमाणु सहमति असैनिक गतिविधियों विशेष तौर पर ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित है. इसके तहत भारत असैनिक कार्यों के लिए परमाणु ईंधन और तकनीकी जानकारी अमरीका और परमाणु ईंधन सप्लाई करने वाले देशों से पा सकेगा. इसके बदले में भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को अपने कुछ परमाणु केंद्रों का निरीक्षण करने की इजाज़त देनी होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें सीनेट में परमाणु समझौता बहुमत से पास17 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस समझौता और बुश प्रशासन का अंतर्द्वंद्व 17 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना परमाणु संयंत्रों को ख़तरा बढ़ा: पाटिल22 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-अमरीका परमाणु सहमति पर बहस16 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार, कांग्रेस की सतर्कतापूर्ण प्रतिक्रिया17 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस जॉर्ज बुश ने मनमोहन सिंह से बात की16 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु सहमति पर वैज्ञानिक 'संतुष्ट'26 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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