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'चीन को परमाणु समझौता स्वीकार' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और अमरीका के बीच हाल में ही हुए परमाणु सहयोग समझौते के मुद्दे पर चीन कोई अड़चन पैदा नहीं करेगा. दिल्ली में एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि चीन ने हाल में ये संकेत दिए हैं. भारतीय विदेश मंत्री का कहना था कि अपनी भारत यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने इस बात पर सहमति जताई कि अंतरराष्ट्रीय असैनिक परमाणु सहयोग को नए सोच के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए. समझौते के तहत अमरीका भारत को असैनिक उपयोग के लिए परमाणु ईंधन देगा. भारत-अमरीका परमाणु समझौते को परमाणु ईंधन आपूर्ति करने वाले समूह देशों से रज़ामंदी लेनी पड़ेगी. इस समूह में चीन भी शामिल है. ग़ौरतलब है कि भारत-अमरीका परमाणु सहयोग समझौते के मुद्दे पर चीन की ओर से कोई आधिकारिक वक्तव्य नहीं आया था. भारत के दौरे के दौरान चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने एक बयान में कहा था कि उनका देश भारत के साथ संबंधों में किसी तरह के स्वार्थी हित नहीं देख रहा है. राष्ट्रपति जिंताओ ने कहा था कि एक शांतिपूर्ण और समृद्ध दक्षिण एशिया क्षेत्र पूरे विश्व के लिए हित में है. | इससे जुड़ी ख़बरें सीनेट में परमाणु समझौता बहुमत से पास17 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार, कांग्रेस की सतर्कतापूर्ण प्रतिक्रिया17 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस चीन-पाक में 'अभूतपूर्व' समझौते संभव22 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु संयंत्रों को ख़तरा बढ़ा: पाटिल22 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु सहमति का पुरज़ोर बचाव17 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस शांति दोनों देशों की ज़रूरत है: प्रणव25 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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