|
परमाणु सहमति का पुरज़ोर बचाव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राज्यसभा में भारत-अमरीका परमाणु सहमति पर चल रही ज़ोरदार बहस में प्रधानमंत्री ने सरकार का पक्ष पुरज़ोर तरीक़े से पेश किया है. प्रधानमंत्री ने संसद के ऊपरी सदन में सदस्यों को आश्वस्त किया भारत-अमरीका सहमति से भारत के हितों को ख़तरा नहीं है और संसद में उन्होंने पिछले वर्ष जो बयान दिया था उस समय से लेकर अब तक कोई परिवर्तन नहीं आया है. मनमोहन सिंह ने संसद में सत्ता पक्ष के सदस्यों की तालियों और मेज़ों की थपथपाहट के बीच कहा, "भारत दुनिया की पाँच परमाणु शक्तियों के साथ बराबरी के स्तर पर खड़ा हुआ है और उसने अपने रणनीतिक निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी क़ायम रखी है." प्रधानमंत्री ने विपक्षी सदस्यों से मुख़ातिब होकर कहा कि वे असहमतियों का सम्मान करते हैं लेकिन सरकार की नीयत पर शक करने के बदले उन्हें चाहिए कि इस समझौते से जुड़ी ठोस बातें करें. उन्होंने लगभग एक घंटे से अधिक चले अपने भाषण में परमाणु सहमति को लेकर लगे सभी आरोपों का सिलसिलेवार ढंग से जवाब दिया. राज्यसभा में इस मामले पर तकरीबन नौ घंटे तक बहस चली जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का सामरिक परमाणु कार्यक्रम इस सहमति से किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होगा और अनुसंधान का काम जारी रहेगा. हमेशा की तरह नीली पगड़ी और बिना बाँह वाली जैकेट पहनकर आए प्रधानमंत्री ने परमाणु सहमति के बारे में लिखित बयान से हटकर कई बातें कहीं. अमरीका प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वामपंथी और दक्षिणपंथी, दोनों ख़ेमों के सांसद आलोचना में कह रहे हैं कि अमरीका के दबाव में यह निर्णय लिया गया है, उन्होंने कहा, "भारत की संप्रुभता और निर्णय लेने की स्वतंत्रता के साथ क़तई समझौता नहीं किया जा सकता और यह पूरी तरह से बराबरी पर आधारित समझौता है." उन्होंने संसदों को आश्वस्त करने के लिए कहा, "आप चिंता मत करिए, भारत का परमाणु शोध कार्य और सामरिक दृष्टि से चलने वाला काम लगातार और निर्बाध गति से जारी रहेगा और भारत को राष्ट्रहित में निर्णय लेने से दुनिया की कोई ताक़त नहीं रोक सकती." उन्होंने कहा, "मैं ख़तरों और चुनौतियों से पूरी तरह वाकिफ़ हूँ लेकिन मैं भारत के भविष्य के लिए सभी चुनौतियों का सामना करने को तैयार हूँ." मनमोहन सिंह ने भावुक होते हुए कहा, "मुझ पर आरोप लगाया जाता है कि मैं एक कमज़ोर प्रधानमंत्री हूँ, इतिहास ही इसका फ़ैसला करेगा कि मैं कमज़ोर हूँ या मज़बूत." उन्होंने सांसदों को याद दिलाया कि वे एक ग़रीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिसने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया, उन्होंने "ख़ुद को उस काँग्रेस पार्टी का सदस्य बताया जिसने नेहरू, इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी जैसे प्रधानमंत्री दिए हैं." ज़रूरत प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को विकास के रास्ते पर चलाने के लिए ज़रूरी है कि वह ऊर्जा के मामले में बेहतर हालत में हो, इसके लिए हर विकल्प उपलब्ध होना चाहिए और परमाणु ऊर्जा एक बेहतर विकल्प है. उन्होंने कहा, "परमाणु ऊर्जा ही सही और आर्थिक दृष्टि से बेहतर विकल्प है. अगर भारत ने इस विकल्प को नहीं अपनाया तो विकास बाधित हो सकता है." प्रधानमंत्री ने सदन को याद दिलाया कि भारत कई बार स्पष्ट कर चुका है कि अगर 18 जुलाई को हुए समझौते में कोई फेरबदल किया जाता है तो यह भारत को मंज़ूर नहीं होगा, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसा नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि कई लोग इसलिए आलोचना करते हैं क्योंकि परिवर्तन से स्थितियाँ बदलती हैं और कुछ लोग यथास्थिति बनाए रखना चाहते हैं लेकिन विकास के लिए परिवर्तन आवश्यक है और यही उनके इस फ़ैसले का कारण है. |
इससे जुड़ी ख़बरें परमाणु सहमति पर वैज्ञानिकों से चर्चा16 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस एनडीए ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा11 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर राज्य सभा में हंगामा03 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस 'समझौते पर अमल में एक साल लगेगा'07 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस श्याम सरन ने रुख़ कड़ा किया01 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस 'भारत को परमाणु तकनीक देना उचित'22 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'सामरिक कार्यक्रम पर कोई अंकुश नहीं'07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-अमरीका में परमाणु सहमति02 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||