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परमाणु समझौते पर राज्य सभा में हंगामा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राज्य सभा में भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने हंगामा किया और सदन की कार्रवाई को स्थगित करना पड़ा. भाजपा की माया सिंह और सुषमा स्वराज ने कहा कि अमरीका से जो रिपोर्टें आ रही हैं उनसे ये डर पैदा हुआ है कि 18 जुलाई 2005 के परमाणु समझौते में भारत के हितों के संदर्भ में कुछ फेरबदल हो सकता है. विपक्ष का कहना था कि सरकार को आश्वासन दिलाना चाहिए कि भारत को आत्मरक्षा के लिए न्यूनतम परमाणु क्षमता रखने की आज़ादी होगी और इस पर समझौता नहीं होगा. विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा का कहना था कि प्रधानमंत्री पहले ही संसद और राष्ट्र को ये आश्वासन दे चुके हैं कि जुलाई 2005 के समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा. उन्होंने ये भी कहा कि केवल असैनिक क्षेत्र में परमाणु केंद्रों की बात हो रही है. लेकिन सांसद संतुष्ट नहीं हुए और सरकार के आश्वासन की माँग करते रहे और राज्य सभा के सभापति को सदन की कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी का कहना था कि कुछ कदम उठाए जा रहे हैं जिनसे संकेत मिलते हैं कि कुछ परिवर्तन हो रहे हैं. उनका कहना था, "पहले प्रधानमंत्री ने जुलाई 18 समझौते के बारे आश्वासन दिए थे लेकिन जिस तरह से पूरा मामला अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में ले जाया जा रहा है उससे संकेत मिलता है कि रवैए में कुछ बदलाव हो रहा है." मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता ने कहा कि सरकार को आश्वासन दिलाना चाहिए फिर चाहे ये प्रस्ताव की शक्ल में हो या फिर बयान की शक्ल में. | इससे जुड़ी ख़बरें 'समझौते से भारत की ताकत बढ़ेगी'27 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस लेबनान मुद्दे पर दिल्ली में प्रदर्शन29 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु सहयोग की मंज़ूरी का स्वागत27 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'नई शर्तें स्वीकार नहीं करेगा भारत'26 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'महंगाई के ख़िलाफ़ आंदोलन होगा'04 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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