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गुरुवार, 12 अक्तूबर, 2006 को 15:58 GMT तक के समाचार
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उत्तर प्रदेश मच्छरों के डंक से बेहाल

उत्तर प्रदेश में अब तक 260 लोगों की जान मच्छर जनित रोगों से गई है
भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मच्छरों ने लगातार दूसरे वर्ष हाहाकार मचा रखा है.

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ मच्छरों से होने वाले दिमाग़ी बुख़ार और डेंगू जैसी बीमारियों से अब तक लगभग 260 लोग मारे गए हैं.

सैकड़ों लोग मच्छरों से फैलने वाली एक और बीमारी चिकनगुनिया बुख़ार से पीड़ित हैं.

अधिकारियों के अनुसार वायरल इंसेफलाइटिस यानी विषाणु से होने वाले दिमाग़ी बुख़ार से पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और तराई में लखीमपुर खीरी के आसपास का इलाका सबसे ज़्यादा प्रभावित है.

चिकनगुनिया बुख़ार का प्रकोप मुख्यतः प्रदेश के दक्षिणी बुंदेलखंड इलाक़े में है.

स्वास्थ्य विभाग में मच्छर जनित बीमारियों की देखरेख करने वाले निदेशक डॉ ओपी पाठक ने बताया कि वायरल इंसेफलाइटिस से अब तक कुल 249 और डेंगू से 10 लोगों के मरने की सूचना है.

राज्य मुख्यालय पर चिकनगुनिया बुखार से मरने वालों की सूचना नहीं है हालाँकि उरई और बुंदेलखंड के अन्य इलाकों में रहस्यमय बुख़ार से मौतों की ख़बरें अख़बारों में छपी हैं.

उधर पूर्वी उत्तर प्रदेश में दिमागी बुख़ार के लिए ज़िम्मेदार जापानी इंसेफलाइटिस के अलावा काम्सकी-बी वायरस भी सक्रिय पाया गया है.

अब तक जो 1085 खून के नमूने लिए गए उनमें 144 में जेई और 61 में काम्सकी वायरस पाया गया.

पिछला साल

पिछले साल उत्तर प्रदेश में लगभग 1600 लोग जापानी इंसेफलाइटिस से मारे गए थे और लगभग इतने ही लोग अपंग हो गए थे.

पिछले वर्ष बहुत बड़ी तादाद में लोग दिमागी बुखार की चपेट में आए थे

1977 से लेकर अब तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में 10 हज़ार से ज़्यादा लोग जापानी इंसेफलाइटिस से मारे गए थे, लेकिन सरकार बराबर अनदेखी करती रही.

पिछले साल बड़ी तादाद में मौतों की चर्चा विश्व भर में हुई तब चीन से टीका मँगाने के लिए मजबूर हुई. अधिकारियों के अनुसार करीब 70 लाख बच्चों को पिछले दिनों टीका लगाया गया मगर ऐसा लगता है कि बहुत से बच्चे अब भी टीका लगने से छूट गए.

अधिकारियों का कहना है कि मच्छर मारने के लिए छिड़काव तेज़ किया जा रहा है. लेकिन बेहतर है कि लोग स्वयं मच्छरों से रोकथाम करें.

अधिकारियों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं और सुविधाएं उपलब्ध हैं, इसलिए दवाएं और सुविधाएँ उपलब्ध हैं. इसलिए घर बैठे खुद इलाज न करें और न ही प्राइवेट डॉक्टरों के महंगे इलाज चक्कर में पड़े.

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