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उत्तरी राज्यों को लेकर मनमोहन चिंतित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विकास के क्षेत्र में उत्तर में स्थित राज्यों के बाक़ी देश से पिछड़ने पर चिंता जताई है. चंडीगढ़ में मुख्यमंत्रियों और उद्योगपतियों के सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने इन राज्यों के नेताओं से अनुरोध किया कि वे व्यापार में आने वाले अवरोध हटाएँ ताकि पूरे क्षेत्र का विकास हो सके. प्रधानमंत्री का कहना था कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तरांचल और जम्मू-कश्मीर में विकास की दर भारत की औसत विकास दर से कम है. उनका कहना था कि आर्थिक रोकटोक और उत्पाद के आने-जाने में रुकावटों से देश का बाज़ार खंडित हुआ है जिससे क्षेत्र में मुक्त व्यापार में बाधा आई है. युवा वर्ग के बारे चेतावनी उन्होंने सरकारों और उद्योग संगठनों से ये भी अनुरोध किया कि वे ऊर्जा के इस्तेमाल, जल प्रबंधन और जनता को जागरूक बनाने में सहयोग करें. उन्होंने चेतावनी दी कि शिक्षा, काबिलियत और स्वास्थ्य प्रबंधन के बिना भारत की युवा जनता आर्थिक और सामाजिक तौर पर देश के लिए सहायक साबित होने की जगह बोझ बन सकती है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुख्यमंत्रियों के चेताया कि वे केवल हेडलाइन बनाने वाले एमओयू यानि सहमति पत्रों और ऐसी रियायतें देने से बचें जो आर्थिक तौर पर व्यवहारिक नहीं हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'धमाकों से शांति प्रक्रिया मुश्किल हुई'15 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान को प्रधानमंत्री की चेतावनी14 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस भारत और पाकिस्तान की कश्मीर पर चर्चा 18 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस कश्मीर अंतरराष्ट्रीय मसला: पाकिस्तान08 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस कश्मीरी नेताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया08 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस कोई विदेशी ताकत हमें हुक्म न दे: भारत07 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-पाक रेल संपर्क पर वार्ता शुरू05 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस भारत पर धौंस जमाने का आरोप03 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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