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फ़िदेल कास्त्रो से मिले मनमोहन सिंह
मनमोहन सिंह और फ़िदेल कास्त्रो
दोनों नेताओं के बीच बातचीत 40 मिनट तक चली
गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने हवाना गए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने क्यूबा के राष्ट्रपति फ़िदेल कास्त्रो से मुलाक़ात की है.

पिछले दिनों फ़िदेल कास्त्रो काफ़ी बीमार हो गए थे और अभी वे आराम कर रहे हैं. इस कारण वे गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में भी हिस्सा नहीं ले पाए.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच 40 मिनट तक बातचीत चली.

मुलाक़ात का ब्यौरा देते हुए संजय बारू ने कहा," जैसा कि आप जानते हैं कि राष्ट्रपति कास्त्रो बीमार चल रहे हैं और इसीलिए वो गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में हिस्सा भी नहीं ले पाए. उन्होंने बहुत कम ही नेताओं से मुलाक़ात की है, वो केवल दो या तीन नेताओं से ही मिले हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ वे काफ़ी गर्मजोशी से मिले."

जानकारी

उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने क़रीब 40 मिनट साथ बिताए जिसके दौरान राष्ट्रपति कास्त्रो ने पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गाँधी और राजीव गांधी के साथ अपने संबंधों को याद किया.

 जैसा कि आप जानते हैं कि राष्ट्रपति कास्त्रो बीमार चल रहे हैं और इसीलिए वो गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में हिस्सा भी नहीं ले पाए. उन्होंने बहुत कम ही नेताओं से मुलाक़ात की है, वो केवल दो या तीन नेताओं से ही मिले हैं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ वे काफ़ी गर्मजोशी से मिले
संजय बारू, मीडिया सलाहकार

बातचीत के दौरान राष्ट्रपति कास्त्रो ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति, कृषि, भारत में खाद्य सामग्री की स्थिति और ऊर्जा संबंधी विषयों के बारे में भी जानकारी ली.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मुलाक़ात में राष्ट्रपति कास्त्रो ने पुरानी बातों को भी याद किया.

संजय बारू ने बताया, "उनके ज़ेहन में भारतीय नेताओं के साथ संपर्क की ढेर सारी और काफ़ी मीठी यादें मौजूद हैं. वे इंदिरा जी के काफी क़रीबी दोस्त थे और मुलाक़ात के बारे में मुझे जो बताया गया है उससे लगता है कि वो इस मुलाक़ात के दौरान पुरानी यादों में खो गए थे."

उन्होंने बताया कि मुलाक़ात के समय केवल दोनों नेता ही मौजूद थे और कोई साथ नहीं था. फ़िदेल कास्त्रो ने 1983 में गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत का दौरा किया था.

1959 की क्रांति के बाद से ही क्यूबा की बागडोर फ़िदेल कास्त्रो के हाथ में है. लेकिन 31 जुलाई को अपनी बीमारी के कारण उन्होंने अपने भाई रॉल कास्त्रो को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाने की घोषणा की.

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