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'सामपुर पर श्रीलंका सेना का नियंत्रण' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में सेना का कहना है कि सैनिकों ने त्रिंकोमाली के पास एक महत्वपूर्ण इलाक़े पर नियंत्रण कर लिया है. विद्रोही सामुपर क्षेत्र का इस्तेमाल त्रिंकोमाली पर हमले करने के लिए करते रहे हैं. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कहेलिया रामबुकवेला ने कहा है कि सरकारी सुरक्षाबलों का सामपुर कस्बे में विद्रोहियों के सैन्य ठिकानों पर कब्ज़ा हो गया है और कस्बे के करीब 75 फ़ीसदी हिस्से पर सेना का नियंत्रण है. कहेलिया रामबुकवेला ने कहा, " अभियान के दौरान हमें ख़ास विरोध का सामना नहीं करना पड़ा, बस कुछ बारुदी सुरंगे थीं रास्ते में." वहीं त्रिंकोमाली में एलटीटीई की राजनीतिक शाखा के प्रमुख एज़हिलान ने बीबीसी तमिल सेवा को बताया कि सामपुर में संघर्ष अब भी चल रहा है. उन्होंने कहा कि तमिल विद्रोही सेना का कड़ा विरोध कर रही है. एज़हिलान ने कहा कि श्रीलंका सेना इलाक़े में अगर आगे बढ़ है तो उसके पीछे काफ़ी नुकसान हुआ है. उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष में अब तक 100 लोग मारे जा चुके हैं और हज़ारों विस्थापित हो चुके हैं. सामपुर के आसपास के इलाक़े में लड़ाई एक हफ़्ते से भी पहले शुरु हुई थी. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार अगर विद्रोही सेना पर हमला नहीं करते हैं तो सामपुर के आस-पास और अभियान नहीं चलाया जाएगा. 'सामपुर अभियान युद्घ नहीं' श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने एक विशेष बयान में कहा है कि सामपुर के पास चला अभियान युद्ध नहीं था बल्कि तमिल विद्रोहियों के हमले की प्रतिक्रिया थी. महिंदा राजपक्षे ने सामपुर पर नियंत्रण की औपचारिक घोषणा सत्ताधारी श्रीलंका फ़्रीडम पार्टी की रैली के दौरान की. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक सामपुर काफ़ी अहम इलाक़ा है और ये सरकार के लिए बड़ी जीत है लेकिन तमिल विद्रोही किसी और जगह जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं. श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच वर्ष 2002 में हुए संघर्षविराम के बाद से इस साल अगस्त में दोनों पक्षों के बीच सबसे भीषण संघर्ष हुआ है. इस साल संघर्ष में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं जिसमें आम नागरिक में शामिल है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक संघर्ष की ताज़ा घटनाओं में दो लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. |
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