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हफ़्तों बाद राहत सामग्री जाफ़ना पहुँची | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले कुछ हफ़्ते से श्रीलंका के जाफ़ना प्रायद्वीप में तमिल विद्रोहियों और सेना के बीच चल रहे संघर्ष के बीच पहली बार वहाँ फँसे लोगों के लिए राहत सामग्री पहुँचाई गई है. वहाँ तीन हज़ार लोग फँसे हुए हैं और हज़ारों विस्थापित हुए हैं. वहाँ फँसे विदेशी लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है. राहत सामग्री लिए समुद्री जहाज़ कोलंबों से चला और लगभग 60 घंटे के बाद जाफ़ना पहुँचा. रेडक्रॉस की ओर से पहुँचाई गई इस राहत सामग्री को जाफ़ना ले जाने के लिए रोडक्रॉस को सरकार और तमिल विद्रोहियों से सुरक्षा गारंटी लेने में कई दिन लगे. वहाँ चावल, दाल, चीनी और अन्य खाद्य पदार्थों की तत्काल ज़रूरत है और बीबीसी संवाददाता डमीथा लूथ्रा का कहना है कि देश के उत्तर-पूर्व में अब लड़ाई जारी है. पिछले दो हफ़्ते से जाफ़ान प्रायद्वीप वहाँ चल रही लड़ाई के कारण बाक़ी के देश से कटा हुआ है. बीबीसी संवाददाता के अनुसार दोनो पक्षों का दावा है कि वे केवल रक्षात्मक कार्रवाई कर रहे हैं लेकिन असल बात ये है कि कोई भी ख़ूनखराबा रोकने के लिए कदम नहीं उठा रहा. | इससे जुड़ी ख़बरें सेना की जाफ़ना क्षेत्र पर बमबारी19 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका के जाफ़ना में भीषण लड़ाई16 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में हवाई हमलों को लेकर विवाद15 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस सेना और एलटीटीई के बीच संघर्ष जारी15 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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