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विदेशियों को जाफ़ना से निकाला गया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तरी श्रीलंका में चल रहे लड़ाई में फँसे कोई 150 विदेशी नागरिकों को लेकर रेडक्रॉस की एक नौका जाफ़ना से रवाना हो गई है. इस नौका में 150 लोग हैं. इनमें से ज़्यादातर विदेशी सहायता कर्मी हैं या फिर वे तमिल हैं जो दूसरे देशों से यहाँ पहुँचे थे. नौका इन लोगों को लेकर त्रिंकोमाली के लिए रवाना हुई है. कई सौ विदेश नागरिक अभी भी वहाँ से निकलने के लिए सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि तमिल विद्रोहियों और सरकारी सुरक्षबलों के बीच चल रही लड़ाई के चलते कोई दो लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा है. उत्तरी श्रीलंका में चल रहे घमासान के कारण पिछले दो हफ़्तों से जाफ़ना का संपर्क टूटा हुआ है. यहाँ फँसे लोगों के बचाव के लिए शुक्रवार को रेडक्रॉस की नौका यहाँ पहुँची थी. उल्लेखनीय है कि पिछले महीने से इस पूरे इलाक़े में भीषण संघर्ष चल रहा है. 2002 में तमिल विद्रोहियों और सरकार के बीच हुए युद्ध विराम के बाद से अब तक का सबसे भीषण संघर्ष है. श्रीलंका सरकार इस अघोषित युद्ध में हवाई हमलों और ज़मीनी लड़ाई के अलावा मोर्टार दाग़ रही है. पिछले दो दशकों में श्रीलंका में हिंसा से 60 हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें हफ़्तों बाद राहत सामग्री जाफ़ना पहुँची25 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस 'यूरोपीय संघ के रूख़ से नाराज़ एलटीटीई'20 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस हज़ारों लोग राहत सामग्री के मोहताज18 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस सेना और एलटीटीई के बीच संघर्ष जारी15 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में कई और मोर्चे खुले12 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में तनाव बढ़ने के मूल कारण04 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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