BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 01 सितंबर, 2006 को 19:41 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
गुजरात में 'बिना चूक गाएँ' वंदे मातरम्

स्कूली बच्चे
वंदे मातरम गाने को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है
गुजरात सरकार ने सात सितंबर को राज्य के स्कूलों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् गाने के संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं.

आदेश में कहा गया है कि ‘राष्ट्रगीत सामूहिक रूप से और बिना किसी चूक के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में गाया जाना चाहिए.’

हालांकि इस निर्देश में धार्मिक स्कूलों और निजी संस्थानों का ज़िक्र नहीं है.

दरअसल भारतीय जनता पार्टी ने अपने शासनवाले सभी पाँच राज्यों के स्कूलों को सात सितंबर को राष्ट्रगीत गाए जाने के लिए कहा है.

मुस्लिम संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और कुछ मुस्लिम संगठनों ने अपने बच्चों को इस दिन स्कूल न भेजने का फ़ैसला किया है.

प्रेक्षकों का कहना है कि गुजरात सरकार ने केवल सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में वंदे मातरम् गाने के निर्देश दिए हैं और मदरसों और निजी संस्थानों में ऐसा करने को न कह कर विवाद से बचने की कोशिश की है.

इधर भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इस मामले पर कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा है कि राष्ट्रगीत जैसे राष्ट्रीय प्रतीक को वैकल्पिक नहीं किया जा सकता है.

उनका कहना था कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता था.

क्रांतिकारी गीत

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रगीत को बंगाली कवि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1876 में अपनी किताब आनंदमठ में संस्कृत में लिखा था. इस गीत को पहली बार 1905 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वाराणसी अधिवेशन में गाया गया था.

थोड़े ही समय में यह गीत काफी लोकप्रिय हो गया और अंग्रेज़ शासन के ख़िलाफ़ क्रांति का प्रतीक बन गया.

बंकिम चंद्र चटर्जी
वंदे मातरम् बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास आनंद मठ का हिस्सा है

पहले इस गीत को ही भारतीय राष्ट्र गान बनाने की कोशिश की गई थी लेकिन मुसलमानों का कड़ा विरोध देखते हुए रवींद्रनाथ ठाकुर के जन-गण-मन को राष्ट्रगान का दर्जा दिया गया.

कड़े विरोध के बावजूद स्वतंत्र भारत में वंदे मातरम् गीत का महत्व लगातार बना रहा. इसे आज भी संसद सत्र शुरू होने से पहले और ख़त्म होने के बाद गाया जाता है.

वर्ष 2005 में भारत सरकार ने घोषणा की थी कि कांग्रेस के वाराणसी अधिवेशन में गाए गए इस गीत के सौ वर्ष पूरे होने के मौक़े पर साल भर समारोह बनाए जाएंगे.

इसी संदर्भ में देश के सारे स्कूलों जिनमें इस्लामी मदरसे भी शामिल हैं, उनको आदेश दिया गया कि 7 सितंबर के दिन इस गीत को गाना अनिवार्य है.

इस घोषणा का मुस्लिम संगठनों ने ज़ोरदार विरोध किया जिसके बाद केंद्र सरकार ने इसे अनिवार्य की जगह ऐच्छिक क़रार दे दिया.

इस बदलाव को भाजपा ने अस्वीकार करते हुए कहा है कि इससे राष्ट्रप्रेम की भावना को ठेस पहुँचती है.

भाजपा के इस निर्णय का कुछ लोग यह कह कर भी विरोध कर रहे हैं कि 7 सितंबर का इस गीत के ऐतिहासिक महत्व से कुछ लेना देना नहीं है.

राष्ट्रगीत पर छिड़ा विवाद
राष्ट्रगीत वंदे मातरम् गाने या न गाने पर छिड़े विवाद की विवेचना.
वंदे मातरम् का इतिहास
क्या कहते हैं वंदे मातरम् पर शोध करने वाले इतिहासकार सव्यसाची?
बंकिम चंद्र बंकिम चंद्र का लेखन
वंदे मातरम्, आनंद मठ और बंकिम चंद्र के लेखन पर विशेष रिपोर्ट.
मुख़्तार अब्बास नक़वीभाजपा का रुख...
भाजपा नेता मुख़्तार अब्बास नक़वी वंदे मातरम् के विरोध को ग़लत मानते हैं.
सैयद अहमद बुख़ारीशाही इमाम की राय...
जामा मस्जिद के शाही इमाम वंदे मातरम् को 'थोपने' के ख़िलाफ़ हैं.
इससे जुड़ी ख़बरें
वंदे मातरम् पर बहिष्कार की धमकी
31 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस
वंदेमातरम मामले पर आपकी राय
31 अगस्त, 2006 | आपकी राय
'वंदे मातरम् थोपा नहीं जा सकता'
30 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस
वंदेमातरम को लेकर विवाद छिड़ा
29 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>