BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 31 अगस्त, 2006 को 13:46 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
वंदे मातरम् पर बहिष्कार की धमकी
स्कूली बच्चे
भाजपा ने अपने शासन वाले पाँच राज्यों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य करने की बात कही है
भारत के पूर्वी राज्य झारखंड के कुछ मुसलमान नेताओं ने कहा है कि वे सात सितंबर को वंदे मातरम् गाना अनिवार्य किए जाने के विरोध में अपने बच्चों के उस दिन स्कूल ही नहीं भेजेंगे.

झारखंड में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और उसने आदेश जारी किया है कि सात सितंबर को सारे स्कूलों में वंदे मातरम् गीत अनिवार्य रूप से गाया जाएगा.

मुस्लिम संगठनों का कहना है कि इस गीत में हिंदुओं की देवी दुर्गा की वंदना की गई है इसलिए इस गीत को गाना इस्लाम धर्म के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है.

कांग्रेस शासित केंद्र सरकार का कहना है कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की शताब्दी के मौक़े पर गाना चाहिए लेकिन ऐसा करना अनिवार्य नहीं है.

'राष्ट्र विरोधी'

वहीं झारखंड सरकार ने इस संबंध में सरकारी नोटिस जारी कर कहा है कि इस दिन राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य है और कोई भी इसका उलंघन नहीं कर सकता है.

इस संबंध में झारखंड के मुस्लिम नेता मौलाना कुतुबुद्दीन रिज़वी का कहना है, "यदि भाजपा शासित राज्य सरकार हम पर वंदे मातरम् को थोपेगी तो हम इसका बहिष्कार करेंगे. हम इसके विरोध में अपने बच्चों को स्कूल ही नहीं भेजेंगे."

तुलना...
 वंदे मातरम् में माँ की वंदना करने की बात कही गई है. यह इस्लाम के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है. एक सच्चा मुसलमान सिर्फ़ अल्लाह के सामने सर झुका सकता है. हम देश की तुलना एक देवी से नहीं कर सकते.
उबैदुल्ला क़ासमी

मौलाना रिज़वी के रुख़ का अन्य मुस्लिम संगठनों ने भी समर्थन किया है.

राँची की एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ाने वाले उबैदुल्ला क़ासमी का कहना है, "वंदे मातरम् में माँ की वंदना करने की बात कही गई है. यह इस्लाम के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है. एक सच्चा मुसलमान सिर्फ़ अल्लाह के सामने सर झुका सकता है. हम देश की तुलना एक देवी से नहीं कर सकते."

एक तरफ़ मुस्लिम संगठन इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर भाजपा में मुसलमान इसका समर्थन कर रहे हैं.

भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेता रिज़वान ख़ान का कहना है, "हम इस बात का ध्यान रखेंगे कि सभी शहरों और क़स्बों में सभी प्रमुख स्थानों में गाया जाए. जो लोग वंदे मातरम् नहीं गाना चाहते वे राष्ट्र विरोधी हैं."

क्रांति का प्रतीक

राष्ट्रगीत को बंगाली कवि बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने 1876 में अपनी किताब आनंदमठ में संस्कृत में लिखा था. इस गीत को पहली बार 1905 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वाराणसी अधिवेशन में गाया गया था.

थोड़े ही समय में यह गीत काफी लोकप्रिय हो गया और अंग्रेज़ शासन के ख़िलाफ़ क्रांति का प्रतीक बन गया.

बंकिम चंद्र चटर्जी
वंदे मातरम् बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास आनंद मठ का हिस्सा है

पहले पहले इस गीत को ही भारतीय राष्ट्र गान बनाने की कोशिश की गई थी लेकिन मुसलमानों का कड़ा विरोध देखते हुए रवींद्रनाथ ठाकुर के जन-गण-मन को राष्ट्रगान का दर्जा दिया गया.

कड़े विरोध के बावजूद स्वतंत्र भारत में वंदे मातरम् गीत का महत्व लगातार बना रहा. इसे आज भी संसद सत्र शुरू होने से पहले और ख़त्म होने के बाद गाया जाता है.

वर्ष 2005 में भारत सरकार ने घोषणा की थी कि कांग्रेस के वाराणसी अधिवेशन में गाए गए इस गीत के सौ वर्ष पूरे होने के मौक़े पर साल भर समारोह बनाए जाएंगे.

इसी संदर्भ में देश के सारे स्कूलों जिनमें इस्लामी मदरसे भी शामिल हैं, को आदेश दिया गया कि 7 सितंबर के दिन इस गीत को गाना अनिवार्य है.

इस घोषणा का मुस्लिम संगठनों ने ज़ोरदार विरोध किया जिसके बाद केंद्र सरकार ने इसे अनिवार्य की जगह ऐच्छिक क़रार दे दिया.

इस बदलाव को भाजपा ने अस्वीकार करते हुए कहा कि इससे राष्ट्रप्रेम की भावना को ठेस पहुँचती है. साथ ही यह घोषणा भी की कि भारतीय जनता पार्टी शासित पाँच राज्यों के स्कलों में 7 सितंबर के दिन इसे गीत को गाना अनिवार्य होगा.

भाजपा के इस निर्णय का कुछ लोग यह कह कर भी विरोध कर रहे हैं कि 7 सितंबर का इस गीत के ऐतिहासिक महत्व से कुछ लेना देना नहीं है.

इससे जुड़ी ख़बरें
वंदेमातरम मामले पर आपकी राय
31 अगस्त, 2006 | आपकी राय
'वंदे मातरम् थोपा नहीं जा सकता'
30 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस
वंदेमातरम को लेकर विवाद छिड़ा
29 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>