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'कर्मचारियों की मौत की स्वतंत्र जाँच' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका सरकार ने कहा है कि एक फ़्रांसीसी सहायता एजेंसी के 15 कर्मचारियों की मौत की घटना की स्वतंत्र जाँच होगी. रविवार को इन कर्मचारियों की लाशें श्रीलंका के मुट्टुर में एजेंसी के कार्यालय में मिली थीं. इन सभी लोगों को नज़दीक से गोली मारी गई थी. इस बीच श्रीलंकाई सेना ने देश के पूर्वोत्तर में तमिल विद्रोहियों पर अपने हमले जारी रखे हैं. सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच संघर्ष उस समय शुरू हुआ था जब दो हफ़्ते पहले विद्रोहियों ने विवादास्पद माविलारु बांध से पानी की सप्लाई रोक दी थी. ये ताज़ा हमले इस समझौते के बावजूद हुए हैं जिसमें तमिल विद्रोहियों ने रविवार को बाँध के गेट खोलने पर सहमति जताई थी. लेकिन श्रीलंका सेना ने तमिल विद्रोहियों पर रविवार को उस समय गोलीबारी की जब वे बांध के गेट खोलने जा रहे थे. उसके बाद तमिल विद्रोहियों ने कहा था कि पानी छोड़ने को लेकर हुआ समझौता खटाई में पड़ गया है. अंतरराष्ट्रीय वार्ताकारों ने कहा है कि वे श्रीलंका सरकार के रवैये से निराश हैं. बाँध से पानी छोड़ने पर श्रीलंका सरकार और विद्रोहियों के बीच सहमति के बाद लग रहा था कि दोनों पक्षों के बीच विवाद थम जाएगा. पर्यवेक्षकों का कहना है कि शायद श्रीलंकाई अधिकारी ये दिखाना चाहते हैं कि उन्होंने बाँध के गेट सैन्य ताकत के बल पर खुलवाए न कि तमिल विद्रोहियों के राज़ी होने के चलते. समझौता नार्वे के शांति दूत जॉन हानसेन बॉवर के साथ बातचीत के बाद तमिल विद्रोहियों ( लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) ने बाँध से पानी छोड़ने घोषणा की थी. दोनों पक्षों के बीच यह समझौता हफ़्तों के संघर्ष के बाद हुआ था. मुट्टूर जलाशय से पानी रोके जाने के बाद लोगों को सिंचाई से जुड़ी दिक्कतें हो रही थीं. विद्रोहियों का कहना था कि नार्वे के शांति दूत ने उन्हें आश्वासन दिया था कि जलाशय के पास विद्रोहियों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुसीबतों का ख़्याल रखा जाएगा. एलटीटीई ने स्पष्ट किया था कि वो इस युद्धविराम का पालन करेंगे लेकिन साथ ही चेतावनी दी थी की सरकार किसी तरह की सैनिक ताक़त का इस्तेमाल न करे. | इससे जुड़ी ख़बरें 'सहायता एजेंसी के 15 लोगों की मौत'06 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका का विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान30 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंकाई सैनिक बम धमाके में मारे गए31 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'संघर्ष फैला, मुस्लिम इलाक़े से भागे'02 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई का मुट्टूर पर क़ब्ज़े का दावा03 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस भीषण लड़ाई के कारण लोगों का पलायन04 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस 'एलटीटीई विद्रोही मुट्टूर से हटे'05 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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