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दिमाग़ी बुख़ार से 58 लोगों की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश में इस वर्ष दिमाग़ी बुख़ार से 58 लोगों की मौत हो गई है जबकि क़रीब 250 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं. इस बीमारी से मरने वालों में अधिक संख्या बच्चों की है. इस बीमारी से लोगों के मरने के ये मामले राज्य के पूर्वी ज़िलों में सामने आए हैं. इनमें से कुछ नेपाल सीमा से सटे हुए हैं. हालांकि इस बीमारी की रोकथाम के लिए इस वर्ष राज्य सरकार की ओर से गर्मी के मौसम में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया था. ग़ौरतलब है कि पिछले वर्ष भी दिमाग़ी बुख़ार से सबसे प्रभावित ज़िलों में पूर्वी उत्तरप्रदेश के गोरखपुर, महाराजगंज और कुशीनगर थे. चिंता सरकारी आँकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष दिमाग़ी बुख़ार से राज्य भर में 1500 से भी ज़्यादा लोगों की जानें गई थीं. इस रोग के शुरुआती मामले भी वर्ष 1977 में राज्य के पूर्वी इलाकों में ही सबसे पहले देखने को मिले. एक अनुमान के मुताबिक तब से लेकर अब तक 10,000 से भी ज़्यादा लोग इस बीमारी के चलते अपनी ज़िंदगी खो चुके हैं. यह बीमारी मुख्य रूप से वर्षा ऋतु के दौरान मच्छरों के काटने से फ़ैलती है. पिछली वर्ष जिस तेज़ी से यह बीमारी इन ज़िलों में फैली उसके बाद सरकार को चीन से बड़े पैमाने पर इसके टीके आयात करने पड़े थे. | इससे जुड़ी ख़बरें दिमागी बुख़ार के ख़िलाफ़ अभियान14 मई, 2006 | भारत और पड़ोस हज़ारों को विकलांग बनाता है मस्तिष्क ज्वर 31 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस दिमाग़ी बुख़ार ने 250 से अधिक जानें लीं28 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस 'महामारी' का आँखों देखा हाल28 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस टीका तैयार करने में मुश्किलें25 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस मस्तिष्क ज्वर से 167 लोगों की मौत23 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस दिल्ली में मेनिंजाइटिस से 15 की मौत06 मई, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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