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दिमागी बुख़ार के ख़िलाफ़ अभियान

दिमाग़ी बुख़ार के मरीज़
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारी जापानी इंसेफ़्लाइटिस वायरस यानी दिमाग़ी बुख़ार के ख़िलाफ़ सोमवार से व्यापक टीकाकरण अभियान छेड़ने जा रहे हैं.

यह बुख़ार हर साल जुलाई से लेकर दिसंबर तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में मौत का क़हर बन कर आता है.

पिछले एक साल में इस बुख़ार ने उत्तर प्रदेश में लगभग 1500 बच्चों की जान ले ली और लगभग इतने ही बच्चों को स्थाई रूप से विकलांग बना दिया.

स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक डॉक्टर (श्रीमती) वी नाथ ने बताया कि चीन में तैयार वैक्सीन आ गई हैं और उन्हें वातानुकूलित ट्रकों के माध्यम से विभिन्न ज़िलों में भेजा जा रहा है.

पहले चरण में इस बुखार से सबसे अधिक प्रभावित रहे गोरखपुर ज़िले में टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा. कड़ी आलोचना के बाद केंद्र सरकार ने चीन से वैक्सीन आयात की है.

अब तक माउस ब्रेन वैक्सीन इस्तेमाल की जा रही थी. जो न केवल महंगी है बल्कि बचाव के लिए उसके तीन टीकों की ज़रूरत पड़ती है.

जबकि चीन की वैक्सीन टिश्यू आधारित है और बचाव के लिए केवल एक टीके की ज़रूरत पड़ती है. डॉक्टर नाथ ने बताया कि केंद्र सरकार ने 65 लाख टीके उपलब्ध कराएं हैं.

डॉक्टर नाथ का कहना था कि यह अभियान हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि हम इस साल किसी बच्चे को मरते हुए नहीं देखना चाहते हैं.

जापानी इंसेफ़्लाइटिस रोग का हमला सबसे पहले जापान में सन 1871 में हुआ. पर इसके विषाणुओं की पहचान 1925 में ही हो पाई थी और 1935 में इस विषाणु का नाम जापानी इंसेफ़्लाइटिस वायरस पड़ा.

भारत में इसे दिमाग़ी बुख़ार के रूप में जाना जाता है. भारत में 1952 में नागपुर और चिंगिलपुर में कुछ रोगियों के रक्त परीक्षण में इस वायरस की मौजूदगी का पता चला था.

पर जहाँ दुनिया और देश के बाकी हिस्सों में इस घातक विषाणु पर काबू पा लिया गया वहीं गोरखपुर में इसने स्थाई रूप से अपने पांव जमा लिए.

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