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गोरखपुर में संचारी रोग संस्थान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने घोषणा की है कि गोरखपुर में एक संचारी रोग शोध संस्थान स्थापित करने की घोषणा की है. मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को गोरखपुर ज़िले में दिमाग़ी बुख़ार से प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया और तभी यह घोषणा भी की. ग़ौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाक़ों में पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान दिमाग़ी बुख़ार से लगभग एक हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है. मृतकों में ज़्यादातर बच्चे थे. मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने ऐसे परिवारों को 25 हज़ार रुपए का मुआवज़ा देने की घोषणा की जिसमें दिमाग़ी बुख़ार से कोई मौत हुई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जो इस बीमारी से गंभीर रूप से विकलांग हुए हैं उन्हें भी पचास-पचास हज़ार रुपए की राहत दी जाएगी. हालाँकि एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस मुआवज़े का फ़ायदा उन्हीं लोगों को मिल सकेगा जो ग़रीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं. यादव ने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के आधुनिकीकरण के लिए क़रीब 11 करोड़ रुपए की राशि देने की घोषणा भी की. यह कॉलेज अभी इस लायक नहीं है कि वहाँ बड़ी संख्या में मरीज़ों का सही इलाज किया जा सके. इस साल इस कॉलेज में दिमाग़ी बुख़ार के मरीज़ों का तांता लग गया था इसलिए काफ़ी मुश्किल हुई थी. मुलायम सिंह की इस यात्रा का विपक्षी दलों ने विरोध करते हुए प्रदर्शन भी किए. दिमाग़ी बुख़ार के मरीज़ों की देखभाल में प्रशासन की कोताही के आरोप लगाते हुए हड़ताल भी की गई. मुलायम सिंह ने कहा कि राज्य सरकार दिमाग़ी बुख़ार की रोकथाम के लिए चीन और कोरिया से दवाई का आयात करने के लिए तैयार है, बशर्ते कि केंद्र सरकार इसे मंज़ूरी दे दे. उधर केंद्र सरकार के स्वास्थ्य अधिकारियों ने दवाई के आयात के लिए पहले से ही मंज़ूरी देने का वादा किया है. |
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