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मस्तिष्क ज्वर से 99 लोगों की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताहों में वहाँ जापानी एनसेफ़्लाइटिस या मस्तिष्क ज्वर से कम-से-कम 99 लोग मारे गए हैं. ये बीमारी मच्छरों के काटने से होती है. बीबीसी के लखनऊ संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी के अनुसार उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने बताया है कि राज्य के विभिन्न अस्पतालों में इस बीमारी से ग्रस्त 300 से अधिक लोगों की चिकित्सा की गई है. कुछ अधिकारियों का कहना है कि इस बीमारी से ग्रस्त और इसके कारण मारे जानेवाले लोगों की संख्या और अधिक हो सकती है. पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाक़ों में 1980 के बाद से लगभग हर साल ये बीमारी अपना प्रकोप दिखाती रही है. अधिकारियों के अनुसार बीमारी को रोकने वाले टीकों की कमी के कारण मुश्किल बढ़ गई है. उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में हर साल पाँच करोड़ ऐसे टीकों की ज़रूरत है लेकिन कसौली स्थित केंद्रीय संस्थान केवल दो लाख टीके ही दे पा रही है. जापानी एनसेफ़्लाइटिस जापानी एनसेफ़्लाइटिस मच्छरों के काटने से होता है जिसमें मच्छर इस बीमारी से ग्रसित जानवरों से कीटाणु लेकर इंसानों में संक्रमित कर देते हैं. एनसेफ़्लाइटिस या मस्तिष्क ज्वर ऐसी बीमारी है जिसमें मस्तिष्क की नसें फूल जाती हैं और मस्तिष्क के भीतर ख़ून बहने लगता है. मुख्य रूप से ये बीमारी चीन और कोरिया में होती है लेकिन दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया के भी कई देशों में ये बीमारी देखी जाती है. शुरूआती अवस्था में अधिकतर लोगों में बीमारी के लक्षण खुलकर नहीं दिखते लेकिन अधिक गंभीर अवस्था में ये बीमारी घातक हो सकती है. बीमारी होने पर लोगों को बुख़ार होता है, कमज़ोरी होती है, वे उल्टी करने लगते हैं और कभी-कभी वे उन्माद की अवस्था में भी चले जाते हैं. |
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