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दिमाग़ी बुख़ार ने 250 से अधिक जानें लीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि पूर्वी ज़िलों में दिमाग़ी बुख़ार से अब तक ढाई सौ लोगों की मौत हो गई है और स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है. गोरखपुर ज़िला सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है और राज्य सरकार ने कहा है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का एक दल रविवार को दिमाग़ी बुख़ार से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहा है. गोरखपुर में आसपास से भी डॉक्टरों को बुलाया गया है और मेरठ, आगरा, इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज से काफ़ी संख्या में डॉक्टर दिमाग़ी बुख़ार के मरीज़ों की देखभाल में लगे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि दिमाग़ी बुख़ार के जो मरीज़ बच्चों अस्पतालों में भर्ती किए जाते हैं उनमें से एक तिहाई की मौत हो जाती है. दिमाग़ी बुख़ार के शिकार वे लोग और बच्चे ज़्यादा होते हैं जो कुपोषण के शिकार होते हैं और डॉक्टरों का कहना है कि जो बच्चे दिमाग़ी बुख़ार के प्रभाव में जीवित बच जाते हैं उनमें से एक तिहाई - विकलांगता के शिकार हो जाते हैं. इस संक्रमण की चपेट में आने वाले चालीस फ़ीसदी लोग ही बच पाते हैं. रोकथाम दिमाग़ी बुख़ार की रोकथाम के बारे में सरकार का ये कहना है कि मच्छर मार दवाई का छिड़काव किया जा रहा है और प्राथमिक, ज़िला चिकित्सालयों में दिमाग़ी बुख़ार के इलाज के इंतज़ाम किए जा रहे हैं. लेकिन मुश्किल ये है कि लोगों में दिमाग़ी बुख़ार के बारे में बहुत कम जागरूकता है और बहुत से लोगों को यह भी पता नहीं है कि यह बीमारी कैसे फैलती है.
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि पिछले तीन सप्ताह के दौरान तो 90 प्रतिशत स्टाफ़ पंचायत चुनाव में लगा लिया गया. गाड़ियाँ चुनाव ड्यूटी में लगी हैं जिससे दिमाग़ी बुख़ार की बीमारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों पर असर पड़ा है. डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में क्षमता से ज़्यादा मरीज़ आ रहे हैं जिससे समुचित इलाज में मुश्किलें आ रही हैं. ऐसे में जो भी संसाधन उपलब्ध हैं उनके सहारे डॉक्टर मरीज़ों को मौत से बचाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं. लेकिन डॉक्टरों की एक बड़ी शिकायत ये है कि प्रमुख राजनीतिक हस्तियाँ जो यहाँ का दौरा कर रही हैं उससे इलाज में बाधा पहुँच रही है क्योंकि हर कोई आकर डॉक्टरों से सवाल पूछते हैं और राज्यपाल और मुख्य सचिव के दौरे के बाद से तो ऐसे दौरों का ताँता ही लग गया है. 'महामारी' गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर आदि ज़िलों में दिमाग़ी बुख़ार के हालात बहुत ख़राब हो रहे हैं और इन ज़िलों के लगभग हर गाँव में एक-दो-चार मरीज़ ज़रूर हैं या कुछ लोगों की जान भी जा चुकी है. डॉक्टरों का कहना है कि जब किसी भी बीमारी के मरीज़ सामान्य से दो या तीन गुना ज़्यादा संख्या में अस्पतालों में आने लगते हैं तो वह महामारी की स्थिति हो जाती है और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी यह मानते हैं कि यह महामारी की स्थिति है लेकिन पता नहीं क्यों सरकार इसे महामारी घोषित करने से कतरा रही है. चिकित्सकों का कहना है कि एक बार जब कुपोषण और संक्रमण से आगे बढ़कर इस तरह की बीमारी हो जाती है तो फिर उसके फैलाव को रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है और इसकी रोकथाम के लिए अगर सरकार कोई अभियान चलाएगी तो उसका असर साल भर बाद नज़र आएगा.
जापानी दिमाग़ी बुख़ार एक तरह के विषाणु से होता है और वह उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में सक्रिय है. यह विषाणु ख़ासतौर से मच्छर से फैलता है जो सुअर के ज़रिए तेज़ी से फैलता है. यह मच्छर विशेष रूप से धान के खेतों में पैदा होता है और पलता है और वहीं से फैलता है. सुअर को एक तरह से दिमाग़ी बुख़ार के विषाणु का कारख़ाना कहा जाता है. अनुमान है कि अगर एक मच्छर काटता है तो उससे दिमाग़ी बुख़ार के पाँच सौ विषाणु पैदा होते हैं और इस तरह यह बढ़ता जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी को इसके लक्षण नज़र आएं तो बिल्कुल शुरू में ही चिकित्सीय मदद ले ली जाए तो मरीज़ को बचाना कुछ आसान हो जाता है. इसके लक्षण होते हैं - सिर में दर्द, जी मितलाना, तेज़ बुख़ार और बेहोशी. दिमाग़ी बुख़ार का विषाणु जब एक बार आदमी के अंदर घुस जाता है तो उससे दिमाग़ में सूजन आ जाती है, तेज़ बुख़ार हो जाता है, मरीज़ बेहोश हो जाता है तो उसके बाद उसके बचने की उम्मीद बहुत कम हो जाती है और अगर बच जाता है तो किसी न किसी तरह की विकलांगता हो जाती है. |
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